Thursday, March 5, 2026
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मथुरा : द्वारिकाधीश मंदिर में आज हुआ तुलसी-सालिग्राम का विवाह

– मथुरा के अन्य मंदिरों में देवोत्थान एकादशी बुधवार को मनाई गई सायं तुलसी विवाह के उपरांत रातभर खुले रहे मंदिर 

– गुरूशरणानंद महाराज के श्रीकृष्ण बलदेव(गोपाल कार्ष्णि) मंदिर में रात्रिभर खुले रहे दर्शन, एक वर्ष में चार बार रात्रिभर खुला रहता गोपाल कार्ष्णि मंदिर 

मथुरा (हि.स.)। श्रीकृष्ण की नगरी में इस बार दो दिनों की देवोत्थान एकादशी मनाई गई जिसके चलते तुलसी-सालिग्राम विवाह उत्सव मंदिरों में अलग-अलग दिनों में सम्पन्न हुआ। जहां श्रीकृष्ण जन्मस्थान, बांकेबिहारी मंदिर, गोपाल कार्ष्णिक मंदिर, राधादामोदर मंदिर में बुधवार आयोजन किया गया जबकि द्वारिकाधीश मंदिर में गुरूवार सायं द्वितीय मुहूर्त में तुलसी और सालिग्राम भगवान का विवाह गन्नों के मंडप के साथ सम्पन्न हुआ। विवाह होने के बाद पूरी रात मंदिर के दर्शन खुले रहे तथा सुबह मंगला आरती नहीं हुई थी। 
वृंदावन के राधादामोदर मंदिर में बुधवार को देवोत्थान एकादशी पर्व पर उत्साह पूर्वक तुलसी सालिग्राम विवाह का आयोजन हुआ। जिसमें श्रद्धालुओं ने कन्या दान कर शादी के माहौल का आनंद उठाया। विवाह में शामिल होने के लिए देश-विदेश के भक्त मौजूद रहे। वहीं जन्म भूमि पर शाम को भागवत भवन से शालिग्राम जी की बारात केशव देव मंदिर प्रांगण में स्थित तुलसी वाटिका तक निकाली गई। इसके बाद प्रतीकात्मक विवाह का आयोजन हुआ। मंदिर द्वारिकाधीश में गुरूवार देवोत्थान एकादशी के अवसर पर सायं साढ़े चार बजे से सवा पांच बजे तक के मुहूर्त में तुलसी-सालिग्राम विवाह हुआ। बुधवार को द्वारिकाधीश मंदिर को छोड़कर सभी मंदिर पूरी रात खुला रहा और श्रद्धालु प्रभु के दर्शन करते रहे। 
द्वारिकाधीश मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एड. के अनुसार घरों में भी माता तुलसी के साथ भगवान सालिग्राम ने भी शादी रचाया। सूरज अस्त होने के साथ ही अधिकतर घरों में गन्ने का मंडप बनाकर यह शादी रचायी गयी। शकरकंद, सिंघाड़ा, सीताफल, अमरूद, मूंगफली और गन्ने आदि का भोग लगाया गया।
रंगेश्वर महादेव मंदिर के समीप स्थित गुरू शरणानंद के गोपाल कृष्ण मंदिर में बुधवार रात्रि तुलसी-सालिग्राम का विवाह सम्पन्न हुआ जहां पूरी रात दर्शन भक्तों ने किए। वहीं गुरूवार सुबह मंगला आरती नहीं हुई, साढ़े नौ बजे भोग के दर्शन भक्तों को हुए। मंदिर के सेवायत पुजारी ने बताया कि एक वर्ष में शिवरात्रि, होली, दीपावली और देवोत्थान एकादशी पर यह मंदिर रात्रिभर खुलता है, जिसके बाद ठाकुरजी सुबह मंगला आरती नहीं करवाते है। क्योंकि रातभर के जागे होते है। 

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