बाराबंकी । कामयाबी चाहिये तो अपना तज््िकयये नफ्स करो (अंतरात्मा को जांचो)। हमेशा की जिन्दगी (मोक्ष) चाहिये तो अहलेबैत की मोहब्बत दिल में बसाओ। कुरआन में तब्दीली मुमकिन नहीं क्योकि उसका मुहाफिज खुद अल्लाह है। यह बात मजलिस ए तरहीम बराये ईसाले सवाब मोहम्मद बाकर मेंहदी नकवी इब्ने वजाहत हुसैन नकवी को खिताब करते हुए मौलाना सै. तकी रजा लखनवी ने कही। मौलाना ने आगे कहा अली के इरफान, फरमान व अरमान पर अमल करके अली के सच्चे शीया बनो। इबादत तवज्जो के साथ करें गफलत में नहीं। हर मखलूक अपने हिसाब से अल्लाह की तस्बीह करती है। कुरआन पर जब जब वक्त आया तब तब अहले तसय्यो ने आवाज उठाया। आखिर में कर्बला वालों के मसायब पेश किए जिसे सुनकर सभी रोने लगे। मजलिस से पहले कशिश सन्डीलवी ने कलाम पेश करते हुए पढ़ा-इन्तेकामे सरवर का फैसला जरूरी है,इस लिये इमामत का सिलसिला जरूरी है। बाकर नकवी ने पढ़ा-जिक्रे शब्बीर जमाने में जहां होता है, उस इलाके में बहोत अम्नों अमां होता है। हाजी सरवर अली कर्बलाई ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा-बैयत को मौत आ गई कर्बो बला के बाद। अपना यजीद ए वख्त भी बिस्तर समेट ले। मुमकिन नहीं है शाह का गम हो सके रकम सरवर तखय्युलात की चादर समेट ले। हैदर मेहदी ने बेहतरीं कलाम पेश किया जहूर काबा का वक्त आ गया इमाम से लौ लगाए रखना। मोहम्मद मेहदी ने तिलावते कलामे इलाही से मजलिस का आगाज किया और निजामत के फरायज बाकर नकवी ने अंजाम दिया। बानिये मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
बाराबंकी : इबादत तवज्जो के साथ करें गफलत में नहीं : मौलाना तकी रजा
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