बलरामपुर| तराई क्षेत्र के पहाड़ी नालों में आई बाढ़ से भारी तबाही हुई है। महराजगंज क्षेत्र अंतर्गत लगभग दर्जन भर गांवों में लोगों के घरों में पानी घुस गया है। कई प्रमुख मार्गों पर आवागमन बाधित है। वहीं ललिया क्षेत्र में पांच प्रमुख मार्गों पर बाढ़ के कारण आवागमन बाधित हुआ है। दो दर्जन गांव पानी से घिरे हैं। धान फसल को भारी नुकसान हुआ है। तुलसीपुर स्थित नकटी नाला में आई बाढ़ का पानी लगभग तीन किलोमीटर दूरी तक सड़कों पर बह रहा है।
तराई में हजारों हेक्टेयर धान फसल तबाह
रामजियावन, संतराम, भरोसे, बेकारू, हलीम, आदि ने बताया कि तराई में पिछले दस दिनों के बीच चार बार बाढ़ आ चुकी है। तराई में हजारों हेक्टेयर धान फसल तबाह हो चुकी है। एक बार बाढ़ आने पर उसका पानी खेतों में ठहर जाता है। धान फसल पानी से सड़ गई है। रामशंकर बताते हैं कि करीब 20 दिनों पहले बाढ़ में फसल गल गई थी। उन्होंने दोबारा धान की रोपाई कराई थी। पिछले दस दिनों में वह भी फसल चौपट हो गई। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि नाला की बाढ़ से उन्हें हर साल क्षति उठानी पड़ती है, लेकिन मुआवजा कभी नहीं मिलता।
एक दर्जन से अधिक गांव पिछले नौ दिनों से जलमग्न
क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांव पिछले नौ दिनों से जलमग्न हैं। यहां पर नौ दिनों से राप्ती तबाही मचा रही है। क्षेत्र के बिरदा बनियाभारी, मटियरिया करमा, भरवलिया, नंदौरी, महुआधनी, बभनजोत, मलमलिया, परसौना, डुडुहिया, मस्जिदिया, नूरपुर, तकिया सहित दो दर्जन से अधिक गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे मवेशियों के चारे का संकट पैदा हो गया है। जलजमाव के कारण हजारों हेक्टेयर धान व गन्ना फसल तबाह हो गई है। फसलों का मुआवजा देने के लिए कोई सर्वेक्षण नहीं हुआ है। बरसात के कारण बिजली की कटौती बढ़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक सरकारी सहायता नहीं मिली है।
