Monday, March 30, 2026
Homeउत्तर प्रदेश बदलाव की मार झेल रहा सूक्ष्म उद्योग 'बतासा'

 बदलाव की मार झेल रहा सूक्ष्म उद्योग ‘बतासा’

लखनऊ(हि.स.)। उत्तर प्रदेश में श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन के वक्त ज्यादातर मंदिरों में प्रसाद के रूप में चढ़ने वाला बतासा के सूक्ष्म उद्योग ने बीते कुछ वर्षों में बदलाव की मार झेली है। बदले वातावरण में मंदिरों में प्रसाद स्वरूप चढ़ने वाले बतासे का स्थान मिसरी, मुंगफली, मौसमी फल ने ले ली है।

नब्बे के दशक में बतासा की उपयोगिता शादी विवाह के वक्त विदाई की मिठाई के रूप में थी, तो मठ मंदिर में भगवान को भोग लगाने के लिए बतासा सर्वाधिक उपयोग किया जाता था। बतासा की मांग रहती थी और इसे बनाने वाले एक दिन में मांग पूरी नहीं कर पाते थे। बतासा की दुकानों पर अब की तस्वीर बदली हुई है। पहले जहां प्रतिदिन 100 किलो से ज्यादा बतासा बिक जाया करता था, अब मात्र 10 किलो से 25 किलो तक ही बतासा की बिक्री हो पाती है।

बतासा की सामग्री हुई महंगी

डालीगंज क्षेत्र में बतासा बनाने वाले रामकिशोर ने बताया कि समय के साथ ही नीबू व चीनी महंगी हुई है। नीबू के रस में चीनी का घोल तैयार कर उसे धीमी आंच पर पकाने से बतासा की सामग्री बनती है। इस सामग्री को सूती कपड़े पर धीरे धीरे गिराकर बतासा बनाया जाता है। पहले से चीनी दोगुने रेट पर बिक रही है। नीबू भी सीजन छोड़कर महंगा हुआ है।

ग्रामीण क्षेत्र में अभी मांग है

शहर के क्षेत्र में बतासा की मांग घटी है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में गिरावट के साथ इसकी अब भी मांग बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्र मोहनलालगंज के बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी सूर्यप्रकाश ने बताया कि उनके यहां मंदिर में भगवान शिव के पूजन के वक्त प्रसाद स्वरूप बतासा चढ़ाया जाता है। इसे वितरित करते हैं। वैसे मंदिर में भगवान हनुमान को बेसन के लड्डू का ही भोग लगता है। ग्रामीण क्षेत्र में अभी बहुत सारे मंदिर में बतासा का उपयोग होता है।

100 रुपये किलो तक बिक रहा बतासा

बीते 10 वर्षों में बतासा के रेट में भी उछाल आया है। पहले 40 रुपये प्रति किलो बिकने वाला बतासा आजकल 100 रुपये किलो तक बिक रहा है। बड़े पैमाने पर(थोक) कई किलो खरीदारी करने पर बतासा 80-85 रुपये तक प्रति किलो के भाग से खरीदा जा रहा है। पुराने मंदिरों में जहां पुराने समय से बतासा की खरीदारी होती है, वहां तय रेट में भी 80 रुपये के नीचे का रेट नहीं लग रहा है।

मंदिरों के अलावा स्कूलों में जाता है बतासा

मठ मंदिरों के अलावा स्कूलों में बतासा जाता है। स्कूलों में होने वाले कार्यक्रमों में बतासा की बिक्री सामान्य रूप से होती रही है। बसंत पंचमी, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों में बतासा की मूलरूप से बिक्री होती है। स्कूल कालेज में बतासा को प्रसाद स्वरूप बांटा जाता है। बदले वक्त में अंग्रेजी माध्यमों के स्कूलों में पर्व मनाने के लिए अब बतासा का उपयोग नहीं करते, बल्कि उसके स्थान पर पेस्टीज, पेटीज, चिप्स बांटने की नई परम्परा शुरू हो चुकी है।

शरद

RELATED ARTICLES

Most Popular