-प्रदेश में 24.11 लाख हेक्टेयर भूमि है समस्याग्रस्त, 43850 हेक्टेयर भूमि को कृषि योग्य बनाने की तैयारी
लखनऊ (हि.स.)। प्रदेश में हर वर्ष कृषि योग्य हजारों हेक्टेयर भूमि शहरीकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे व डिफेंस कारिडोर आदि में चला जा रहा है। इससे खेती की भूमि का रकबा घटता जा रहा है। इसकी भरपाई करने के लिए उप्र सरकार ने पांच साल में 43850 हेक्टेयर खराब भूमि को कृषि योग्य बनाने का फैसला किया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 24.11 लाख हेक्टेयर भूमि समस्याग्रस्त है अर्थात उसमें खेती नहीं की जा सकती। इसमें खेती के लिए कृषि के लिए अयोग्य भूमि 4.42 लाख हेक्टेयर, कृष्य बेकार भूमि 3.88 लाख हेक्टेयर, परती भूमि 15.81 लाख हेक्टेयर है। सरकार का मानना है कि यदि इस भूमि का उपयोग कृषि कार्य में कर लिया जाय तो घट रही भूमि की भरपाई कर ली जाएगी। इसके लिए सरकार ने अगले पांच साल की कार्य योजना तैयार की है। सरकार ने फैसला किया है कि अगले पांच साल में इसमें 43850 हेक्टेयर भूमि को कृषि या कृषि वानिकी के लिए उपयुक्त बनाया जाएगा। यह भूमि जिन किसानों की है, यह उन्हीं को मदद कर, उन्हीं के लिए उपयुक्त बनाने का काम सरकार करेगी। इसके लिए मनरेगा की फंडिंग का भी उपयोग किया जाएगा।
इस संबंध में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का कहना है कि इस पं. दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना से एक ओर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वहीं किसानों के लिए ज्यादा भूमि कृषि योग्य मिलेगी। यह पांच साल की योजना पीछे भी चली थी। इसको आगे भी जारी रखा जाएगा।
उपेन्द्र
