लखनऊ (हि.स.)। ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबंधन के विरोध में बिजली कर्मियों ने गुरुवार को शक्तिभवन पर प्रदर्शन किया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेश भर के पहुंचे कर्मचारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गयीं तो वे अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार के लिए मजबूर होंगे।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के पदाधिकारियों ने बताया कि ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबन्धन के स्वेच्छाचारी रवैये एवं नकारात्मक कार्य प्रणाली के कारण ऊर्जा निगमों में आर्थिक क्षति हो रही है। इस हठवादी व नकारात्मक रवैये के कारण ही 27 अक्टूबर को दी गयी नोटिस पर संघर्ष समिति से ऊर्जा के शीर्ष प्रबन्धन द्वारा कोई भी वार्ता नहीं की गयी है, जो बिजलीकर्मियो के प्रति उनकी उदासीनता दर्शाता है।
बिजली कर्मचारियों, अवर अभियन्ताओं व अभियन्ताओं की मुख्य मांगों में सभी बिजली कर्मियों को पूर्व की भांति 09 वर्ष, कुल 14 वर्ष एवं कुल 19 वर्ष की सेवा के उपरान्त 03 पदोन्नत पदों के समयबद्ध वेतनमान दिये जायें, निर्धारित चयन प्रक्रिया के अन्तर्गत चेयरमैन, प्रबन्ध निदेशकों व निदेशकों के पदों पर चयन किया जाये। सभी बिजली कर्मियों को कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जाये, ट्रांसफार्मर वर्कशॉप के निजीकरण के आदेश वापस लिए जायें तथा 765, 400, 220 केवी विद्युत उपकेन्द्रों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से चलाने का निर्णय रद्द किया जाये। पारेषण में जारी निजीकरण प्रक्रिया निरस्त की जाये। आगरा फ्रेंचाईजी व ग्रेटर नोएडा का निजीकरण रद्द किया जाये आदि है।
प्रदर्शन में राजीव सिंह,प्रभात सिंह, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, जीबी पटेल, जय प्रकाश, गिरीश पांडेय, सदरुद्दीन राना, मायाशंकर तवारी, सुहेल आबिद, पी के दीक्षित, शशिकान्त श्रीवास्तव, चन्द्र भूषण उपाध्याय, डीके मिश्रा, मो इलियास, महेन्द्र राय आदि उपस्थित रहे।
उपेन्द्र
