–मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्र में 851 करोड़ के सड़क कार्यों का किया लोकार्पण—शिलान्यास
लखनऊ (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत केवल सरकार की धनराशि पर ही निर्भर ना रहें बल्कि अपनी स्वयं की आय कैसे बढ़ा सकती हैं इसके बारे में भी अगर चिंता करेंगी तो वह स्वावलंबी बनेंगी। इससे हर गांव का व्यक्ति स्वाबलंबी बनने की ओर कदम आगे बढ़ा सकेगा।
मुख्यमंत्री रविवार को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत 204 करोड़ रुपये की लागत से 56 जनपदों में 2,095 किलोमीटर लम्बे 748 मार्गों एवं पंचायती राज विभाग के माध्यम से 647 करोड़ की लागत से बनने वाली 2000 किलोमीटर लम्बी 1825 सड़कों का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लोकार्पण-शिलान्यास के दौरान बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत के पास गांव में जमीन है, क्षेत्र पंचायत के पास अपने-अपने क्षेत्र में जमीन है। इसी तरह जिला पंचायतों के पास भी बहुत जमीन है। गांव के हाट तो जिला पंचायत द्वारा ही संचालित होते थे। इसको आय के साथ जोड़ने का कार्य हो सकता है। मंडी समिति के साथ मिलकर ग्रामीण हाट को विकसित करने का काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हम सिफारिश पर सारा कार्य करने का काम करते हैं, आय बढ़ाने का कार्य नहीं करते हैं। जब पैसा आएगा नहीं और एकतरफा जाने की व्यवस्था रहेगी तो आपके हाथ बंध जाएंगे। कोई उधार भी नहीं देगा। इसलिए हमें पंचायतों को स्वावलम्बी बनाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम विकास विभाग और पंचायती राज विभाग ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधार ग्रामीण सड़कों के निर्माण के बड़े कार्यक्रम को आज जिस तरह से आगे बढ़ाया है, यह प्रसन्नता की बात है। उन्होंने कहा कि इसमें भी यह महत्वपूर्ण है कि 75 जनपदों में से 45 जनपदों में महिला जिला पंचायत अध्यक्ष कार्य कर रही हैं और विकास के बारे में उनके पास अपना एक अनुभव तथा जिज्ञासा भी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के जरिए गांवों में विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि यह योजना स्व. अटल बिहारी वाजपेई ने प्रधानमंत्री बनने के बाद इस देश के अंदर शुरू की थी। यह अपने समय में बेहद लोकप्रिय योजना बनी थी, क्योंकि पहली बार आजाद भारत के अंदर ग्रामीण सड़क योजना पर कार्य करते हुए इसे 2001 में लागू किया गया। आजादी के पांच दशक तक भारत की ग्रामीण व्यवस्था उन बुनियादी सुविधाओं से वंचित थी, जो विकास की प्रक्रिया के सबसे बड़े सशक्त माध्यम होते हैं।
उन्होंने कहा कि तब से प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना ने अनेक चरण संपन्न किए हैं और अधिकांश 500 की आबादी वाले गांव, मजरे सभी इस योजना से पूरी तरह जुड़ चुके हैं। अब उससे भी नीचे के छोटे-छोटे मजरा, टोला को लेने की व्यवस्था इसके साथ जोड़ी गई है। उन्होंने कहा कि एक क्रांतिकारी परिवर्तन इसमें देखने को मिला है। सबसे बड़ी बात है कि जिला पंचायत की कार्य पद्धति में भी व्यापक परिवर्तन हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायतों को विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धनराशि उपलब्ध कराने का कार्य किया है। उस धनराशि का सदुपयोग अगर सभी पंचायती राज की संस्थाएं करने लग जाएं तो विकास और रोजगार की व्यापक संभावनाएं आगे बढ़ सकेंगी। हर गांव में बेहतर कनेक्टिविटी, जल निकासी की बेहतर व्यवस्था दी जा सकती है। गांव में जितनी धनराशि ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत को मिलती है और आपस में मिलकर बेहतर समन्वय के माध्यम से कार्य पद्धति को आगे बढ़ा दिया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में कूड़ा प्रबंधन का भी बेहतर कार्य हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव में स्वच्छता की स्थिति के माध्यम से अनेक प्रकार की बीमारियों को हम नियंत्रित कर सकते हैं। इसके साथ ही हर गांव में कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत यानी ग्राम सचिवालय के माध्यम से काफी कार्य किये जा सकते हैं। इससे ना केवल गांव के सामान्य नागरिकों की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है बल्कि गांव पर ही ग्रामीण सचिवालय के माध्यम से जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, बैंकिंग की सुविधा यानी बैंकिंग कोर्स के माध्यम से सुविधा को वहां पर देने का कार्य कर सकते हैं। इसके साथ ही बिजली का बिल जमा करने की सुविधा गांव के लोगों को वहां पर उपलब्ध करायी जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वाभाविक रूप से जितने कार्य होंगे, उसमें उतने ही नौजवानों और महिलाओं के लिए रोजगार सृजन हो सकता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए इससे जुड़ी महिलाएं सचमुच बहुत अच्छा कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री ने बीते वर्ष अपने झांसी दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि वहां दूध से जुड़ी समिति ने बहुत अच्छा कार्य किया है। ऐसे ही हर गांव, हर जनपद में संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा हमारे वहां कहा गया है कि ‘अयोग्य: पुरुषो नास्ति योजक: तत्र दुर्लभ:’ यानी हमारे ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत योजक की भूमिका में आ जाएं, तो कोई भी गांव, ग्रामीण क्षेत्र, कहीं भी कोई भी महिला, नौजवान अपने आप को बेरोजगार नहीं मान सकते। आर्थिक स्वावलंबन का एक नया आदर्श प्रस्तुत कर सकते हैं और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वरोजगार स्वराज की परिकल्पना को भी आप साकार कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महत्वपूर्ण नहीं होता कि कितने गांव में आपने कुछ ना कुछ दे दिया। अब तो हर गांव में धनराशि आ गई है। हर ग्रामीण पंचायत के पास धनराशि है। कुछ ऐसा करिए, जिसे वास्तव में आप अपने कार्यकाल का बता सकें। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत गांव के अंदर इंटरलॉकिंग, सीसी निर्माण, कूड़ा प्रबन्धन आदि के कार्य करें। गांव साफ सुथरा है तो यह अपने आप में एक पहचान होती है।
