पौध तैयार कर स्वरोजगार स्थापित कर सकती हैं महिलाएं
कानपुर (हि.स.)। जैविक खेती से जहां एक तरह किसान अपनी जमीन की उर्वरकता को बरकरार रख सकते हैं तो वहीं उत्पादकता को भी बढ़ा सकते हैं। यह काम महिलाएं आसानी से कर सकती हैं और जैविक खेती से आत्मनिर्भर भी बन सकती हैं। यह बातें बुधवार को महिला सशक्तिकरण पर हो रहे प्रशिक्षण के तीसरे दिन सीएसए के मृदा वैज्ञानिक डॉ खलील खान ने कही।
चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (सीएसए) के प्रसार निदेशालय द्वारा महिला सशक्तिकरण विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है। तीसरे दिन मृदा वैज्ञानिक डॉ खलील खान ने जैविक खेती विषय पर पांच जनपदों की प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के टिप्स दिए। उन्होंने बताया कि जैविक कीटनाशक, जैविक खादें फसलों में डालकर गुणवत्ता युक्त उत्पाद पैदा कर बाजार में अच्छे उच्च दामों पर बिक्री कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। गृह वैज्ञानिक डॉ आशा यादव महिलाओं की किशोरावस्था, गर्भावस्था एवं रजोनिवृत्ति के समय उचित देखभाल करने एवं संतुलित आहार पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह समय महिलाओं के लिए बहुत ही जटिल तथा पीड़ादायक होता है। जिसके लिए बिशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
सह प्राध्यापक उद्यान डा. सुभाष चन्द्रा ने फल एवं सब्जी पौधशाला प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी देते हुए आवाहन किया कि आप पौध तैयार कर स्वरोजगार स्थापित कर सकतीं हैं। जो बहुत लाभकारी होगा। अटारी की प्रधान वैज्ञानिक डा.साधना पाण्डेय देश एवं प्रदेश में कुपोषण की भयावह स्थिति पर जानकारी देते हुए बताया कि महिलाओं को अपना स्वयं एवं बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना होगा, क्योंकि कि परिवार में जब महिलाएं स्वस्थ होंगी तो पूरा परिवार स्वस्थ होगा तभी आर्थिक विकास होगा। कार्यक्रम संयोजक, डा.एस.बी.पाल एवं सह संयोजक डा.अनिल कुमार सिंह द्वारा समय के मांग के अनुरूप वैज्ञानिकों की वार्ताओं का प्रबंधन कर सफल आयोजन कराया जा रहा है। डा. सोहन लाल वर्मा ने उपस्थित रहकर सहयोग किया।
