Thursday, August 20, 2026
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चिकित्सकों को मुफ्त उपहार पर छूट न दिए जाए : कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता विकास श्रीवास्तव ने कहा, केंद्र सरकार को दवा मूल्य निर्धारण नीति में 2013 से पूर्व नीति अपनाने और भी व्यापक सुधार की जरूरत

लखनऊ (हि.स.)। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर आयकर अधिनियम की धारा 37(1) के तहत चिकित्सकों को मुफ्त उपहार पर छूट न दिए जाने की मांग किया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विकास श्रीवास्तव ने आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एवं केन्द्र सरकार ने अपने चहेती दवा कंपनियों को कोरोना महामारी के दौरान जबरदस्त लूट करने का अवसर दिया।

कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि इसका ताजा प्रमाण यह है कि विगत छह जुलाई को आयकर विभाग द्वारा बेंगलुरू स्थित डोलो 650 टैबलेट के निर्माता “माइक्रो लैब्स लिमिटेड ” पर डाले गए छापे के दौरान दवा कंपनियों की लूट और केन्द्र सरकार की घोर लापरवाही उजागर हुई। इस पूरे आर्थिक भ्रष्टाचार में दवाइयों के मूल्य निर्धारण प्रक्रिया में स्वास्थ्य मंत्रालय की लचर नीति उजागर हुई। दवा कंपनियों की मुनाफाखोरी का भी खुलासा हुआ है। उन्होंने बताया कि फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने भी “डोलो कंपनी” की इस हरकत को लेकर जनहित याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार से 10 दिन में जवाब मांगा है।

प्रवक्ता विकास श्रीवास्तव ने बताया कि यूपी कांग्रेस ने अक्टूबर 2020 में ही तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से पत्र भेजा और जानकारी मांगी थी कि भारत में आवश्यक “दवाइयां और रेमडेसिवीर” अमेरिका से भी 72 गुना अधिक मूल्य पर क्यों उपलब्ध कराई जा रही है? तब तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने मामले को बिना संज्ञान में लिए अपनी चहेती दवा कंपनियों को लूट का पूरा अवसर दिया।

कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री से मांग किया गया है कि चिकित्सा विशेषज्ञों से मिली जानकारी के मुताबिक 500 मि.ग्रा.पेरासिटामोल के लिए “ड्रग प्राइसिंग अथॉरिटी” कीमत तय करती है, लेकिन जैसे ही डोज को बढ़ाकर 650 मि.ग्रा. किया जाता है । यह नियंत्रित कीमत के दायरे से बाहर हो जाता है। मूल्य निर्धारण की इसी खामी का लाभ उठाकर दवा कंपनियां अपने प्रोडक्ट का खुद ही मनमाना मूल्य निर्धारित करने का अधिकार पा जाती हैं, क्योंकि सरकार का इस पर कोई हस्तक्षेप नहीं रहता है। सारी भ्रष्टाचार की जड़ मूल्य निर्धारण की यही लचर नीति है।

उपेन्द्र

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