Monday, March 30, 2026
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चार्जशीट और स्पष्टीकरण मांगने की प्रक्रिया पर बिजली अभियंताओं ने जतायी नाराजगी

लखनऊ (हि.स.)। पावर ऑफिसर एसोसिएशन की प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक में पूरे प्रदेश के सभी बिजली कंपनियों के अभियंता वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़कर हर बात पर चार्जशीट व स्पष्टीकरण मांगने पर नाराजगी जतायी। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि किसी कार्मिक के दोष का आरोप लगाए जाने पर चार्जशीट देने से पहले ही उसकी पदोन्नति नहीं रोकी जानी चाहिए।

पावर ऑफिसर एसोसिएशन की रविवार को प्रांतीय कार्यसमिति में चार प्रस्ताव पास किया गया। इसमें कहा गया कि पावर कारपोरेशन और शासन की स्पष्ट नीति है कि विजिलेंस की जांच में जब तक कार्मिक को चार्जशीट नहीं मिलती, तब तक वह दोषी नहीं माना जाएगा। इसके बावजूद पावर कारपोरेशन दोष के आरोपित कर्मियों की पदोन्नति रोक रहा है, जो सरासर गलत है। लंबे समय से निलंबित सभी उन अभियंताओं को बहाल किया जाए, जिनके द्वारा अपने आरोप पत्र का जवाब पावर कारपोरेशन प्रबंधन को दिया जा चुका है। बिजली निगमों में कारपोरेशन प्रबंधन एक बार कुछ महीनों के लिए बिजली अभियंताओं को स्वतंत्र कर दे। उन्हें काम करने का पूरा मौका मिले तो परिणाम ज्यादा बेहतर आएंगे। इसकी प्रबंधन कल्पना भी नहीं कर सकता।

उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर एसोसिएशन की प्रांतीय कार्य समिति की आज एक आपात बैठक फील्ड हॉस्टल कार्यालय में संपन्न हुई। पदाधिकारियों ने कहा कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान क्षेत्रीय अभियंताओं ने बड़े पैमाने पर यह सज्ञानित कराया की हड़ताल के बाद से दलित अभियंताओं को टारगेट कर उनकी फर्जी शिकायतें हो रही हैं, जिससे उनकी छवि धूमिल हो सके। ऐसे सभी मामलों पर पावर कारपोरेशन व शासन की नीति के तहत बिना शपथ पत्र के कोई कार्यवाही न हो, इसे प्रबंधन को बताया जाए। पावर ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष के बी राम, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष एसपी सिंह, महासचिव अनिल कुमार, सचिव आर.पी.केन आदि मौजूद रहे।

उपेन्द्र/दिलीप

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