Thursday, April 2, 2026
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 काशी के विकास की चर्चा आज पूरे देश और दुनिया मेंः नरेन्द्र मोदी

-प्रधानमंत्री ने अपने संसदीय क्षेत्र को 1780 करोड़ की 28 विकास परियोजनाओं की दी सौगात

बोले-आप भले सरकार कहें लेकिन मोदी खुद को सेवक मानता है

वाराणसी(हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को अपने संसदीय क्षेत्र काशी को 1780 करोड़ की 28 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। इसमें नौ परियोजनाओं का शिलान्यास और 19 परियोजनाओं का लोकार्पण शामिल है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर स्थित खेल मैदान में देश के पहले रोप.वे डिजाइन को देखने के बाद इसका शिलान्यास कर प्रधानमंत्री ने जनसभा को सम्बोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी के विकास की चर्चा आज पूरे देश और दुनिया में हो रही है। जो काशी में आ रहा है वो यहां से ऊर्जा लेकर जा रहा है। प्रधानमंत्री ने लोकार्पित और शिलान्यास हुई 28 परियोजनाओं से मिलने वाली सुविधाओं का विस्तार से उल्लेख कर कहा कि सड़क हो, पुल हो, रेल हो, एयरपोर्ट हो कनेक्टिविटी के तमाम नए साधनों ने काशी आना-जाना बहुत आसान कर दिया है। अब जो रोपवे यहां बन रहा है इससे काशी की सुविधा और आकर्षण बढ़ेगा

उन्होंने कहा कि गंगा के दोनों ओर पांच किलोमीटर के दायरे में प्राकृतिक खेती होगी। इसका बजट में भी प्रविधान किया गया है। करखियांव में पैकेजिंग सेंटर बनारस, गाजीपुर, जौनपुर समेत छोटे शहरों के उत्पाद लंदन व दुबई जैसे देशों तक ले जाएगा। निर्यात से किसानों तक पैसा आएगा। उन्होंने कहा कि आज केंद्र व प्रदेश में जो सरकार है गरीब की सेवा करने वाली सरकार है। आप भले सरकार कहें लेकिन मोदी खुद को सेवक मानता है।

उन्होंने कहा कि 25 मार्च को मुख्यमंत्री के दूसरी पारी का एक साल पूरा हो रहा है। दो तीन दिन पहले योगी ने सबसे अधिक कार्यकाल का रिकार्ड बनाया है। सुरक्षा व सुविधा जहां बढ़ती है, समृद्धि बढ़ती है। नए प्रोजेक्ट समृद्धि के रास्ते सशक्त करते हैं। प्रधानमंत्री ने भोजपुरी भाषा से अपने सम्बोधन की शुरुआत कर कहा कि वाराणसी इस बात की गवाही देती है कि चुनौती चाहे कितनी ही बड़ी क्यों न हो, जब सबका प्रयास होता है तो नया रास्ता भी निकल ही जाता है। 8-9 साल पहले जब काशी के लोगों ने अपने शहर के कायाकल्प का संकल्प लिया था ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी में सरकार की योजनाओं का हजारों लोगों को लाभ मिल रहा है। 2014 से पहले लोग बैक से कर्ज लेने के बारे में नहीं सोचते थे। 2014 से पहले का वह समय याद करें जब बैंक में खाता खुलवाने में पसीना छूट जाता था। ऋण लेने के बारे में तो आम आदमी सोच ही नहीं पाता था। अब ऐसा नहीं है। पशुपालक और किसान से लेकर रेहड़ी पटरी वाले भी बैंक से लोन लेकर अपना काम कर रहे हैं। हमारा प्रयास यही है कि देश की आज़ादी के अमृत काल में हर भारतीय का योगदान हो।

श्रीधर

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