Tuesday, March 17, 2026
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औरैया : बाढ़ की विभीषिका से जीवन बचा, जीविका पर छाए संकट के बादल

औरैया (हि.स.)। “कहते है जल है तो कल है” लेकिन इसी जल ने तबाही मचा रखी है। चंबल, यमुना, सिन्ध, क्वारी, पहुज नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई घरों की जीविका पर संकट खड़ा कर दिया है। यह त्रासदी उन ग्रामीणों पर आई है जो यमुना की बीहड़ पट्टी पर बसें हुए है। तबाही का मंजर तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि बाढ़ के पानी ने यमुना की बीहड़ी इलाकों व पट्टी पर बसें गांवों को अपनी आगोश में ले लिया है। इस त्रासदी से बचने के लिये ग्रामीणों ने अपनी जान बचाने के लिये गांव को छोड़कर ऊंचें स्थानों पर तम्बू तानकर जीवित रहने का ठिकाना बनाकर फिलहाल जीवन तो बचा लिया है लेकिन उनके सामने अब सबसे बड़ी चुनौती जीविका पर संकट के बादल छाने का है।

यमुना सहित पंचनद में बाढ़ ने गांव को ही नहीं डुबोया, बल्कि गांव के आस-पास उन खेतों को भी डुबोया जिस पर ग्रामीणों की जीविका निर्भर हुआ करती है। वैसे तो किसान कभी बेमौसम की मार तो कभी सूखे की मार झेलता चला आ रहा है लेकिन अबकी बार उनके जीवन और जीविका दोनों पर संकट आ गया है। इस बाढ़ ने कई सैकड़ा गांवों की हजारों बीघा खेती को नष्ट कर दिया है, जिनसें ग्रामीण किसानों का जीवकोपार्जन हुआ करता था। किसानों ने फसल की बुआई के समय अपनी जीवन के सपने संजोए थे कि उनकी जब फसल पक कर तैयार हो जाएगी तो उन्हें बेचकर परिवार का भरण-पोषण करेगें। किसी किसान ने बेटी की शादी तो किसी के पिता का इलाज होना था, लेकिन इस बाढ़ ने सब कुछ खत्म सा कर दिया। अब किसानों की जिंदगानी सिर्फ भगवान भरोसे है। फिलहाल इस त्रासदी से ग्रामीण किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।

जिला प्रशासन व सरकार के मंत्री बाढ़ की चपेट में आये गांवों का दौरा करने में जुट गए हैं लेकिन उनके द्वारा दी जा रही मदद से किसानों की स्थिति संभलने वाली नहीं है क्योंकि सरकारी योजनाओं से छणिक लाभ तो मिल जाएगा लेकिन उनके नुकसान की पूर्ति अब नहीं हो पाएगी। इसलिए यह संकट उन पर अभी फिलहाल में बरकरार रहेगा। बाढ़ की त्रासदी को लेकर जिलाधिकारी ने तहसीलदारों को दौरा कर पर्याप्त मदद प्रभावित ग्रामीणों को देने के निर्देश दिए हैं।

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