लखनऊ(हि.स.)। उत्तर प्रदेश में उर्दू को संकट से उबारने के लिए दो दशक से तमाम नीतियां बनी और इस पर क्रियान्वयन भी हुआ। बीते कुछ वर्षों से उर्दू के जानकारों ने विकास के रुक जाने की बात कही और विशेष रूप से साहित्य के क्षेत्र में कुछ न करने के आरोप भी लगे। वहीं वर्तमान प्रदेश सरकार ने उर्दू को शैक्षणिक संकट से उबारने के लिए कई कार्य किए और योजनाओं को पूरा करने के लिए निर्देश भी दिए।
वर्तमान समय में उप्र उर्दू अकादमी के चेयरमैन चौधरी कैफुल वरा हैं और वह अपने अकादमी के कार्यक्रमों को बखूबी पूरा कराने में जुटे रहते है। इन दिनों उर्दू अकादमी पुराने कार्यों के साथ ही उर्दू पुस्तकों के पुरस्कार कार्यक्रम, पुस्तकों की सेल लगाने, पुस्तकालयों के प्रकाशन में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, कक्षा छह से पीएचडी तक के छात्रों को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने, केन्द्रीय उर्दू पुस्तकालय का संचालन कराने पर जोर दिया जा रहा है।
उर्दू अकादमी अपने विषय से जुड़े शायरों, दीबों को एकमुश्त सहायता दिलाने के लिए भी प्रदेश सरकार ने प्रयास किए हैं और इसकी सूची को सुनिश्चित कराया गया है। गत दिनों बनी सूची में कुछ नाम कम हुए हैं, और नये नाम जुड़ गए हैं।
उप्र उर्दू अकादमी की ओर से संगोष्ठियां कोविड काल में वर्षों बंद रही और आने वाले दिनों में इसे पुन: शुरू करने की योजना है। संगोष्ठियों के साथ ही मुशायरा कार्यक्रमों को भी कराने की योजना है। फिलहाल प्रदेश सरकार की ओर से उर्दू अकादमी में भी फेरबदल की तैयारी है और इसके बाद ही कोई कार्यक्रम हो पाना सम्भव हो सकेगा।
इसके साथ ही उर्दू अकादमी के भवन को दुरुस्त कराने, प्रेक्षागृह की मरम्मत कराने को लेकर भी प्रस्ताव बनाया जा रहा है, जबकि मरम्मत एवं निर्माण के लिए पर्याप्त बजट की व्यवस्था अभी नहीं है। बजट व्यवस्था के लिए अलग से प्रस्ताव भेजा जाना है।
शरद
