Thursday, August 20, 2026
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उप्र 2027 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है?

प्रो. यशवीर त्यागी

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को वर्ष 2024 -25 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके लिए रोड मैप सुझाने के लिए सलाहकार की सेवाएं लेने का निर्णय लिया गया। सरकार ने 19 जून, 2020 को निविदाएं और ‘प्रस्ताव के लिए अनुरोध’ (RFP) के लिए नोटिस जारी किया और 10 सितंबर, 2020 को एक संशोधित आरएफपी जारी किया गया। 22 मार्च 2021 को सरकार ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए यह कहकर कि “इस संबंध में नई निविदा सूचना जल्द प्रकाशित होने की संभावना है”- सम्पूर्ण प्रक्रिया को रद्द कर दिया। अब 15 मार्च, 2022 को एक सलाहकार की सेवाओं को काम पर रखने के लिए पुनः निविदाएं आमंत्रित करते हुए नया नोटिस जारी किया गया है। लेकिन लक्ष्य की समय सीमा 2020-25 से बदलकर 2022-27 कर दिया गया है। निविदाएं 25 मई, 2022 को खोली जाएंगी और उसके बाद सलाहकार के चयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

21 फरवरी 2018 को पहली बार ‘यू.पी. इन्वेस्टर्स समिट’ में प्रधानमंत्री मोदी ने यह विचार व्यक्त किया कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर आकार की पहली राज्य अर्थव्यवस्था का दर्जा पाने में एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। जुलाई 2019 में प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि भारत अगले पांच वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इसके तुरंत बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की, कि इस राष्ट्रीय उद्देश्य को प्राप्त करने में योगदान देने के लिए यूपी को भी ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का प्रयास करेंगे।

केंद्र और राज्य दोनों के नेताओं और सरकारी पदाधिकारियों द्वारा विभिन्न अवसरों पर इस उद्देश्य का उल्लेख किया जाता रहा है। यह विश्वास भी व्यक्त किया गया कि राज्य में इस उद्देश्य को प्राप्त करने की क्षमता है। यह भी कहा जा रहा है कि भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का राष्ट्रीय उद्देश्य तब तक प्राप्त नहीं किया जा सकता जब तक कि यूपी एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था नहीं बन जाता है।

वर्तमान में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में यूपी का हिस्सा लगभग 8% है। इसे बढ़ाकर 20% करना होगा, यदि यूपी और भारत दोनों को क्रमशः 1 ट्रिलियन डॉलर और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करना है। कार्य की कठिन प्रकृति और महती लक्ष्य को देखते हुए विशेष रूप से यूपी के संदर्भ में, इस मुद्दे को वास्तविकता के धरातल पर पूरी तरह से जांच-परख करने की आवश्यकता है।

लक्ष्य के निहितार्थ और व्यवहार्यता

सर्वप्रथम एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के अर्थ और निहितार्थ को स्पष्ट रूप से समझना होगा। संशोधित समय-सीमा में आधार और लक्ष्य वर्ष क्रमश: 2021-22 और 2026-27 हैं। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लक्ष्य डॉलर के संदर्भ में है जबकि जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) रुपये में मापा जाता है और इसलिए इसे डॉलर में परिवर्तित किया जाना है। इस कारण रुपया-डॉलर विनिमय दर अतिमहत्वपूर्ण हो जाती है। समझने वाली आखिरी बात यह है कि जीएसडीपी (वर्तमान कीमतों पर) के नामिक मूल्य को लक्ष्य तिथि तक बढ़ाकर एक ट्रिलियन डॉलर करना है। इन मापदंडों को देखते हुए आइए अब हम 2027 तक एक ट्रिलियन-डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की व्यवहार्यता की जांच करें।

आर्थिक सांख्यिकी निदेशालय (DES) योजना विभाग, यूपी सरकार द्वारा किए गए नवीनतम अनुमानों के अनुसार यूपी (सन्दर्भ: राज्य आय के अग्रिम अनुमानों (2021-22) की प्रेस विज्ञप्ति) की सकल राज्य घरेलू उत्पाद का मूल्य वर्ष 2021-22 के लिए 19.10 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वर्तमान विनिमय दर 76-77 रुपये प्रति डॉलर के बीच मंडरा रही है। यदि विनिमय दर 76 रुपये प्रति डॉलर मानी जाये तो 2021-22 में जीएसडीपी का मूल्य 251 बिलियन डॉलर होगा। इसलिए एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए नामिक जीएसडीपी 2021-22 में 19.10 लाख करोड़ रुपये के अपने स्तर से बढ़कर 2026-27 में 76 लाख करोड़ रुपये हो जाना चाहिए और वह भी पांच साल की छोटी अवधि में।

किसी भी हिसाब से जीएसडीपी के आकार को चार गुना बढ़ाना एक कठिन काम है। उपरोक्त आंकड़ों के साथ एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अगले पांच वर्षों में जीएसडीपी में 31.8% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) की आवश्यकता होगी। COVID-19 महामारी के बाद आर्थिक सुधार को बनाए रखने और उच्च स्थिर विकास को बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है। भविष्य में डॉलर की तुलना में रुपये के बाहरी मूल्य में गिरावट की अत्यधिक संभावना है। (वास्तव में रुपया पहले ही 77 रुपये से नीचे गिर चुका है)। ये सभी कारक जीएसडीपी संवृद्धि की आवश्यक दर को और अधिक उच्च स्तर पर ले जायेंगे।

यह देखा गया है कि 2011-12 से 2019-20 के दौरान उत्तर प्रदेश की नामिक जीएसडीपी की औसत वार्षिक वृद्धि 11.37% रही है। वास्तविक रूप (स्थिर कीमतों पर) में यह वृद्धि केवल 5.84% है। समय के साथ डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्यह्रास के कारण डॉलर में जीएसडीपी की वृद्धि दर भी कम है, इसी अवधि के दौरान यह केवल 6.1% है। अगर सकल राज्य घरेलू उत्पाद की संरचना को देखें, तो यह पाया जाता है कि वर्ष 2019-20 के लिए वर्तमान कीमतों पर जीएसडीपीमें प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक क्षेत्रों की क्रमशः 24.8%, 24.9% और 50.4% की हिस्सेदारी है। यदि समग्र रूप में, जीएसडीपी में लगभग 32% की वृद्धि दर की आवश्यकता है तो तीन क्षेत्रों- प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक को भी 30-40% के बीच की दर से सालाना बढ़ने की आवश्यकता है। जाहिर है, ये दरें हकीकत के दायरे से बाहर हैं। यहां तक कि चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसी चमत्कारिक अर्थव्यवस्थाएं भी अपने सुनहरे दिनों में भी 30-40% के बीच की दर से नहीं बढ़ी हैं। यह जीएसडीपी के आकार को एक ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ाने के कठिन कार्य को दर्शाता है।

राज्य सरकार के विचार

यूपी सरकार द्वारा जारी मूल आरएफपी दस्तावेज ने स्वयं कार्य की विशालता को स्वीकार किया और कहा,”हालांकि, पांच वर्षों (2020-25) में एक ट्रिलियन-डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए जीएसडीपी के आकार को लगभग पांच गुना बढ़ाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होगा।” दस्तावेज ने फिर से रेखांकित किया, “यह हर्क्युलीन (कठिन) कार्य राज्य सरकार द्वारा आगे बढ़ने के लिए कुछ बड़े कदम उठाए जाने की मांग करता है।”

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में ‘ब्रांड यूपी’ और निवेश का माहौल सुधारने के लिए योगी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसके प्रयासों का फल तब मिला जब ‘यूपी इन्वेस्टर्स समिट-2018’ काआयोजन किया गया और आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 4.68 लाख करोड़ रुपये के निवेश के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए और इन एमओयू में से 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर आ गया है।

निवेश के मोर्चे पर नवीनतम यह है कि लगभग 75000 करोड़ रुपये के निवेश की 1500 परियोजनाओं के साथ तीसरा ‘ग्राउंड-ब्रेकिंग समारोह’ 3 जून, 2022 को आयोजित होने जा रहा है। इसके अलावा, एक निवेशक शिखर सम्मेलन आगामी जुलाई में आयोजित किया जा सकता है जिसमें10 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार के आगामी बजट (वर्ष 2022-२23), जिसका आकर लगभग 6 लाख करोड़ रुपये होगा, में भी राज्य अर्थव्यवस्था को ट्रिलियन डॉलर की बनाने हेतु उपायों की झलक देखने को मिलेगी।

यूपी एक्सप्रेस-वे, मेट्रो रेल और हवाई अड्डों के निर्माण के द्वारा आर्थिक बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए भी भारी निवेश कर रहा है जिससे कनेक्टिविटी में सुधार हो रहा है। राज्य ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की अखिल भारतीय रैंकिंग में भी दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

इन सभी के फलस्वरूप यूपी तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ने की अच्छी स्थिति में है, लेकिन यह उम्मीद करना कि 4-5 वर्षों में यह एक ट्रिलियन-डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगी, यथार्थवादी नहीं है। निवेश के लिए कई पूरक संसाधनों को जुटाने की आवश्यकता होती है और एक अवधि के पश्चात ही उत्पादन प्रारम्भ होता है और तत्पश्चात उसका लाभ अर्थव्यवस्था को मिलता है।

वैकल्पिक परिदृश्य

इसका तात्पर्य यह नहीं है कि यूपी ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के आकार को प्राप्त करने में सक्षम नहीं है। सकल राज्य घरेलू उत्पाद की विभिन्न विकास दरों और समय अवधि के साथ यथार्थवादी परिदृश्य अनुमानित किए जा सकते हैं। हमने देखा है कि लगभग 31.8% की वृद्धि दर (CAGR) के साथ अगले पांच वर्षों के भीतर एक ट्रिलियन-डॉलर का आंकड़ा प्राप्त किया जा सकता है। इसी लक्ष्य को क्रमशः 15%, 12% और 10% की वृद्धि दर (CAGR) के साथ क्रमशः दस, बारह और पंद्रह वर्षों में प्राप्त किया जा सकता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इन अनुमानों के लिए, 19.10 लाख करोड़ रुपये की जीएसडीपी के साथ आधार वर्ष 2021-22 है। अनुमानित विनिमय दर रुपये 76 = 1 डॉलर है। यदि भविष्य में डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आती है, जिसकी अधिक संभावना है, तो लक्ष्य प्राप्ति हेतु जीएसडीपी की वृद्धि की आवश्यक दरों में तदनुसार वृद्धि होगी। सरल शब्दों में इसका अर्थ है कि यूपी को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए अगले 10-15 वर्षों के लिए वास्तविक रूप से दोहरे अंकों की विकास दर से बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। यह काम भी आसान नहीं होगा। लेकिन एक स्थिर नीति व्यवस्था और बड़े आंतरिक और बाहरी झटकों के बिना इसको उपलब्ध करने का प्रयास किया जा सकता है।

उपरोक्त विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि ‘उत्तर प्रदेश: एक ट्रिलियन-डॉलर की अर्थव्यवस्था’ को एक निश्चित समयावधि के लक्ष्य की अपेक्षा एक आकांक्षी लक्ष्य के रूप में अधिक माना जाना चाहिए। इसको राज्य में विकास और संवृद्धि की प्रक्रिया को तेज करने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सरकार को प्रेरित करने में एक प्रेरक कारक के रूप में लिया जाना चाहिए। यह अधिक समीचीन होगा यदि राज्य सरकार स्पष्ट प्राथमिकताओं के साथ पंद्रह वर्षों की दीर्घकालिक सन्दर्शी योजना तैयार करे जिसमें विभिन्न सेक्टरों, क्षेत्रों और कृषि-जलवायु हेतु योजनाएं शामिल की जाएं। एक प्रभावी कार्यान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन तंत्र को भी विकसित किया जाये। इस दीर्घकालिक योजना में सामाजिक संकेतकों में सुधार के साथ-साथ जनसंख्या का नियंत्रण और स्थिरीकरण भी प्राथमिकता वाला क्षेत्र होना चाहिए। केवल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) या सकल राज्य घेलू उत्पाद (GSDP) के आकार के बारे में सरोकार ना रखें बल्कि सतत मानव विकास प्राप्त करने पर अधिक ध्यान केंद्रित करें जो वास्तव में समावेशी हो।

(लेखक, लखनऊ विवि में अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष हैं।)

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