Thursday, July 30, 2026
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आजादी का अमृत महोत्सव : 1857 की क्रांति गाथा को कैनवास पर उकेरने का प्रयास

– गंगू मेहतर के नाम से डाक टिकट जारी करने का संदेश देती पेंटिंग

लखनऊ (हि.स.)। आजादी के अमृत महोत्सव पर 1857 के महान क्रान्तिकारी गंगू मेहतर की स्मृति में लखनऊ के अलीगंज स्थित ललित कला अकादमी में राष्ट्रीय चित्रकला शिविर का आयोजन किया गया है। इस शिविर में देश के कई प्रांतों से चित्रकार आये हुए हैं। चित्रकार 1857 की क्रांति गाथा को कैनवास पर उकेरने का प्रयास कर रहे हैं।

यह शिविर महान क्रांतिकारी गंगू मेहतर की स्मृति में आयोजित की गई है। इसलिए उनके जीवन संघर्ष के विविधि पहलुओं को कैनवास पर उकेरा गया है। सभी चित्रकारों ने गंगू मेहतर के जीवन से जुड़े किसी न किसी पहलू को अपनी विधा के जरिए समाज के सामने लाने का प्रयत्न किया है। कलाकारों ने लगभग 200 से 300 फिट के कैनवास पर क्रान्तिकारी गंगादीन उर्फ गंगू मेहतर के जीवन को चित्रित है।

दिल्ली से आए चित्रकार लक्ष्मण कुमार ने क्रांतिकारी गंगादीन उर्फ गंगू मेहतर की हथकड़ी में जकड़े हुए बड़ी अच्छी पेंटिंग तैयार की है। लक्ष्मण कुमार ने बताया कि इनका मात्र एक चित्र उपलब्ध है। हम लोग उसी चित्र के आधार पर अलग-अलग पेंटिंग तैयार कर रहे हैं। यह पेंटिंग बेहद आकर्षक है।

दिल्ली की चित्रकार मंजीत कौर ने अपनी पेंटिंग के माध्यम से क्रांतिकारी गंगू मेहतर के नाम से डाक टिकट जारी करने की मांग केंद्र सरकार से की है। मंजीत कौर ने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि जिनके बलिदान के कारण हमें आजादी मिली उनके नाम से डाक टिकट जारी करना चाहिए। मंजीत कौर ने गंगू मेहतर के डाक टिकट को कैनवास पर उकेरा है। पंजाब से आए जगजीत सिंह और महाराष्ट्र के नासिक के ऋषिकेश और देवाकर शर्मा ने बेहद आकर्षक पेंटिंग तैयार की है।

शिविर में आए कलाकारों ने गंगू मेहतर के अतिरिक्त 1857 की क्रान्ति के नायकों जैसे झांसी की रानी लक्ष्मी बाई, नाना राव पेशवा, तात्या टोपे से जुड़ी क्रान्तिकारी घटनाओं से सम्बन्धित चित्रों को भी चित्रित किया है। क्षेत्रीय सचिव डाॅ. देवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि शिविर का समापन 13 नवंबर को होगा।

कौन थे गंगू मेहतर

गंगादीन उर्फ गंगू मेहतर 1857 की क्रांति के महान क्रांतिकारी थे। वह 1857 की क्रांति के नायक नाना फड़नवीस की सेना में नगाड़ा बजाने का काम करते थे। नाना फड़नवीस को जब मारे जाने की सूचना गंगू मेहतर को मिली तब उन्होंने नगाड़ा फेंककर तलवार उठा ली और अंग्रेज सिपाहियों पर टूट पड़े। बाद में अंग्रेजों ने गंगू मेहतर को पकड़कर घोड़े से बांधकर कानपुर में घुमाया। इसके बाद सार्वजनिक रूप से अग्रेजों ने इन्हें फांसी दे दी। महान क्रांतिकारी गंगू मेहतर ने कहा था, “इस मिट्टी में देशभक्तों के खून की गंध आती है। यह देश एक दिन आजाद होगा।”

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