Sunday, March 1, 2026
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कसौटी का तत्सम रूप क्या है?

नालेज डेस्क

कसौटी एक प्रकार का काला पत्थर होता है, जिस पर रगड़कर सोने की शुद्धता या उत्तमता को परखा जाता है। अर्थात सोने की परख की जाती है। योग्यता, विशेषता, सामर्थ्य, गुण आदि जानने के लिए अच्छी तरह से देखने या परखने की क्रिया या भाव को ‘कसौटी’ माना जाता है। तत्सम, वे शब्द हैं, जो संस्कृत से ज्यों के त्यों हिंदी भाषा में प्रयोग किये जाते हैं। कसौटी तद्भव रूप है। इसका तत्सम रूप है कषपट्टिका। कषपट्टिका शब्द संज्ञा और स्त्रीलिंग है। संस्कृत से प्राकृत में इसका रूप बना- ‘कसवट्टी’ और फिर हिंदी में इसे ‘कसौटी’ कहा जाने लगा।

हमारे मन्दिरों में शालिग्राम भगवान इसी पत्थर के होते हैं। पत्थर की कुँडी यानि खरल भी इसी पत्थर के बने होते हैं। वैसे खरल लोहे के भी होते हैं। जिस खरल में डालकर औषधि आदि को कूट कर महीन करते हैं वह पत्थर की ही होती है। कसौटी शब्द सुनते ही परखने क्रिया का भाव सामने आ जाता है। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचन्द ने अपनी कहानी कर्तव्य और प्रेम का संघर्ष में लिखा है : ‘प्रेम की ऑंखें मनभावों के परखने की कसौटी है।’ जयशंकर प्रसाद जी अपनी कविता ‘कसौटी’ में लिखते हैं :
‘तिरस्कार कालिमा कलित हैं,
अविश्वास-सी पिच्छल हैं।
कौन कसौटी पर ठहरेगा?
किसमें प्रचुर मनोबल है?’

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