पकड़ी गई महिला उम्मीदवार तीन साल के लिए सभी परिक्षाओं से प्रतिबंधित
UPSC Exam ban: कठोर कार्रवाई में उम्मीदवारी रद्द, भविष्य की परीक्षाओं से डिबारमेंट ने बनाया डर का माहौल
नेशनल डेस्क
नई दिल्ली! UPSC Exam ban के तहत संघ लोक सेवा आयोग ने एक महिला उम्मीदवार पर कड़ा शिकंजा कसते हुए उसे तीन वर्षों के लिए आयोग की सभी परीक्षाओं और चयन प्रक्रियाओं से प्रतिबंधित कर दिया है। आयोग ने इस साल की उसकी उम्मीदवारी भी रद्द कर दी। मामला उस समय सामने आया जब हाल ही में आयोजित एक भर्ती परीक्षा के दौरान उम्मीदवार के पास से आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई। आयोग के अनुसार, यह उम्मीदवार परीक्षा के नियम 12(1)(h) के अंतर्गत दोषी पाई गई, जिसमें परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों के प्रयोग को स्पष्ट रूप से दंडनीय माना गया है।
आयोग ने अपने लिंक्डइन पोस्ट के माध्यम से बताया कि आरोपी उम्मीदवार के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। UPSC Exam ban लागू करते हुए आयोग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। चेयरमैन अजय कुमार ने दोहराया कि आयोग अपनी परीक्षाओं में पारदर्शिता, नैतिक मानकों और मेरिट आधारित चयन प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, इसलिए जो भी उम्मीदवार अनुचित साधनों या दुर्व्यवहार में लिप्त पाए जाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई अनिवार्य है।
UPSC Exam ban की यह कार्रवाई केवल एक व्यक्तिगत मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सभी उम्मीदवारों के लिए कड़ा संदेश है जो परीक्षा के नियमों को दरकिनार करने की कोशिश करते हैं। आयोग ने साफ कहा है कि परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने के लिए भविष्य की परीक्षाओं से प्रतिबंध जैसे कदम उठाना आवश्यक हैं, ताकि केवल योग्यता और ईमानदारी के बल पर ही सरकारी सेवाओं में चयन सुनिश्चित हो सके।
मामले की गंभीरता इसी से स्पष्ट होती है कि उम्मीदवार की मौजूदा उम्मीदवारी रद्द करने के साथ-साथ उसे आगामी तीन वर्षों तक आयोग द्वारा आयोजित किसी भी परीक्षा में बैठने से वंचित कर दिया गया है। यह UPSC Exam ban दर्शाता है कि परीक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की अनुचित गतिविधि को आयोग बर्दाश्त नहीं करेगा। आयोग की सख्ती नई नहीं है। इससे पहले भी यूपीएससी ने अनुचित लाभ लेने वालों पर कार्रवाई की है।
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पिछले साल पूर्व आईएएस प्रशिक्षु पूजा खेड़कर के खिलाफ भी आयोग ने कठोर कदम उठाए थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते हुए ओबीसी और दिव्यांग कोटे का गलत लाभ लिया और सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होकर चयन पाया। इस मामले में आयोग ने आपराधिक मामला भी दर्ज कराया था। UPSC Exam ban जैसे कदमों की निरंतरता बताती है कि आयोग बीते 100 वर्षों से अपने आप को निष्पक्षता और योग्यता आधारित प्रणाली का प्रतीक बनाए हुए है, जहां किसी भी पृष्ठभूमि से आने वाला उम्मीदवार केवल मेहनत और क्षमता के दम पर आगे बढ़ सकता है।
इस घटना ने एक बार फिर अभ्यर्थियों को आगाह किया है कि परीक्षा केंद्र में लाए जाने वाले किसी भी सामग्री, उपकरण या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट पर सख्त निगरानी रखी जाती है। नियम 12(1)(h) जैसे उपबंधों के तहत अनुचित साधनों का प्रयोग सीधे-सीधे कठोर दंड की श्रेणी में आता है। आयोग की यह स्पष्ट नीति है कि निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ ही परीक्षा प्रणाली में जनता का भरोसा कायम रह सकता है, और UPSC Exam ban जैसे दंडात्मक प्रावधान इसी विश्वास को मजबूत करते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आयोग की इस तरह की निर्णायक और समयबद्ध कार्रवाई से दो अहम संदेश जाते हैं। पहला, परीक्षा की गरिमा से खिलवाड़ करने वालों के लिए शून्य सहनशीलता की नीति लागू है। दूसरा, ईमानदार और मेहनती उम्मीदवारों के हितों की रक्षा करना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यही वजह है कि UPSC Exam ban के जरिए आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसी भी तरह का अनुचित लाभ लेकर सिस्टम को कमजोर करने वालों के लिए भविष्य की परीक्षाओं के दरवाजे बंद कर दिए जाएं।
आखिर में, यह मामला उन सभी अभ्यर्थियों के लिए चेतावनी है जो परीक्षा प्रक्रिया को हल्के में लेते हैं। नियमों का पालन, पारदर्शिता में विश्वास और मेरिट के प्रति सम्मान ही वह बुनियादी आधार है, जिस पर संघ लोक सेवा आयोग की पूरी चयन प्रणाली टिकी हुई है। UPSC Exam ban की यह कार्रवाई इसी सिद्धांत की दृढ़ पुष्टि है।
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