रुपयों के लिए घिनौनी हरकत कर रहा महिलाओं का गैंग
प्रादेशिक डेस्क
गोरखपुर। सावधान…शहर में ऐसा गिरोह सक्रिय है, जो लोगों को दुष्कर्म के मामले में फंसाकर रुपये ऐंठ रहा है। गैंग की महिलाएं मास्टर माइंड के इशारे पर तहरीर देती हैं और रुपये मिलते ही चुप हो जाती हैं। एक बार जो चंगुल में फंसा उससे तब तक वसूली होती है, जब तक वह मना न कर दे। गैंग में पेशेवर महिला-पुरुषों के अलावा कानून के जानकार भी हैं, जो पर्दे के पीछे से गिरोह को संचालित करते हैं।
हालिया प्रकरण गीडा के 68 वर्षीय बुजुर्ग व्यापारी का है, जिन पर छह महीने में ही दुष्कर्म के पांच वाद दाखिल हो गए। अंजली, पानमती, शीला, सुशीला जैसे काल्पनिक नामों से दाखिल सभी वादों में आरोप एक ही था कि व्यापारी ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनके साथ दुष्कर्म किया। बेइज्जती और कानूनी झंझट से बचने के लिए व्यापारी ने जब तक रुपये दिए, तब तक मामला कचहरी से ही निपटता रहा और मना करने के बाद व्यापारी ही नहीं उनके दो बेटों पर भी दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करा दिया। पुलिस ने विवेचना शुरू की तो शीला, सुशीला जैसे काल्पनिक नामों वाली महिलाएं दर्ज पते पर मिली ही नहीं। पुलिस ने दो मुकदमों में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगाकर व्यापारी और उनके बेटों को क्लीनचिट दे दी। व्यापारी और उनके बेटों पर अब पांचवा मुकदमा भी दर्ज हो गया है, जिसकी विवेचना जारी है। यह गिरोह ऐसे लोगों को निशाना बनाता है, जो उन्हें चुपचाप रकम दे सकते हैं। व्यापारी अकेले नहीं हैं, इनके जैसे दर्जनों परिवार इस गिरोह के चंगुल में फंसकर तड़प रहे हैं।
अंजली और पानमती के नाम से नवंबर, 2020 में दो अलग-अलग वाद दाखिल हुए। दोनों में नौकरी दिलाने के नाम पर दुष्कर्म का आरोप था। गिरोह के संपर्क करने पर व्यापारी ने बेइज्जती के डर से समझौता कर लिया। रुपये मिलने के बाद चार पेशियों पर अंजली पहुंची न पानमती। नतीजा, दोनों वाद खारिज हो गए। दो बार रुपये ऐंठ चुके गिरोह ने फिर रुपये मांगे। मना करने पर व्यापारी के खिलाफ शीला और सुशीला के नाम से तीसरा व चौथा वाद दाखिल हुआ। मुकदमा दर्ज करने का भी आदेश हो गया। पुलिस तक मामला पहुंचने पर घबराए व्यापारी परिवार को फिर समझौता करना पड़ा। विवेचना में वादी महिलाएं मिलीं न घर। पुलिस ने व्यापारी को क्लीन चिट देते हुए एफआर लगा दी। चार बार रुपये ऐंठने के बाद गिरोह ने व्यापारी व उनके दो पुत्रों पर दुष्कर्म व कुकर्म के आरोप में पांचवां वाद दाखिल किया। फोन कर पैसे मांगे। इसकी विवेचना चल रही है। गिरोह की महिला के नाम से न्यायालय में दुष्कर्म का वाद दाखिल किया जाता है। फिर संबंधित व्यक्ति को फोन पर दावा दाखिल होने की सूचना देकर समझौते की पेशकश की जाती है। व्यक्ति ने रुपये दे दिए तो ठीक वरना मुकदमा दर्ज कराने के लिए न्यायालय में पैरवी तेज हो जाती है। पुलिस से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद गिरोह के सदस्य पुलिस बनकर पूछताछ का रुआब दिखाते हैं। थाने से पता करने पर व्यक्ति को मामला सही मिलता है। अधिकांश मामलों में इतने में समझौता हो जाता है। इतने पर भी रुपये नहीं देने वाले के खिलाफ गैंग की महिला बयान दर्ज करा देती है और मुकदमा दर्ज करने का आदेश हो जाता है।
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