-मिर्जापुर के पहाड़ियों में मिला था अधजला शव
वाराणसी (हि.स.)। कोतवाली थाने के हिस्ट्रीशीटर शुभम केशरी और उसके दोस्त रवि पांडेय की मिर्जापुर जनपद में मिले अधजले शव मामले का पर्दाफाश मंगलवार को पुलिस ने कर दिया। मृत शुभम केशरी के पांच दोस्तो ने ही पांच लाख में सुपारी लेकर पूरे वारदात को अंजाम दिया था। जिन पर शुभम आंख मूंद कर विश्वास करता था। पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो पांचों ने राज उगल दिया।
गिरफ्तार आरोपितों को यातायात पुलिस लाइन के सभागार में मीडिया के सामने पेश कर एसएसपी अमित पाठक ने पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हत्यारोपितों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल, मृतक शुभम केशरी के कपड़े और मृतक रवि पांडेय का काली जैकेट भी बरामद हो गई। उन्होंने बताया कि पूरे वारदात की जड़ में हड़हा थाना चौक निवासी सुनील निगम पुत्र स्व0 दयाप्रसाद निगम है। सुनील निगम के बहनोई मोहन निगम का शुभम केशरी के परिवार पर देनदारी थी। बकाए रकम की वापसी को लेकर शुभम केशरी पर मोहन निगम के साले सुनील ने दबाव डालने के साथ ही उसके पिता और अन्य परिजनों को बेइज्जत कर दिया था। पिता की बेइज्जती से खार खाये शुभम ने अपने साथी नाटे यादव के साथ मिलकर 28 अगस्त वर्ष 2017 को मोहन निगम की हत्या कर दी थी। इस हत्या के आरोप में शुभम जेल में भी बंद रहा। जेल से जब शुभम बाहर आया तो सुनील निगम को अपनी जान का भय सताने लगा। अपने जीजा की हत्या को लेकर सुनील पहले से ही बदले की आग में जल रहा था।
एसएसपी ने बताया कि शुभम केशरी को रास्ते से हटाने के लिए सुनील ने साजिश रच दी। इसमें उसने शुभम के दोस्तों को ही मोहरा बनाया। जिन पर शुभम भरोसा करता था। सुनील ने शुभम की हत्या की सुपारी उसके ही दोस्त रमाकांत नगर सिगरा निवासी नीरज पाण्डेय पुत्र दयानन्द पाण्डेय और सूजाबाद पडाव थाना रामनगर निवासी दिलशेर को दी। पांच लाख में सौदा तय हुआ। पूरी योजना के तहत नीरज और दिलशेर ने शुभम को रमाकांत नगर कालोनी में 5 जनवरी को खाने.पीने की दावत में बुलाया। मित्रों के खतरनाक मंसूबों से अनजान शुभम अपने साथ रवि पांडेय को भी ले गया। वहाँ पहले से तैयार टंडिया थाना बबुरी जनपद चन्दौली निवासी परवेज, रमाकान्त नगर थाना सिगरा निवासी गुड्डू भारद्वाज, नीरज और दिलशेर के साथ शराब और गांजा का जमकर दौर चला। जब शुभम और रवि नशे में धुत हो गए तब दोनों की गला दबाकर हत्या कर दी गई। इसके बाद लोहटिया से एक मालवाहक बुक कराकर शवों को उसमें रखकर पांचों मिर्जापुर अहरौरा की पहाड़ियों गये। वहां उन्होंने शवों को फेंक दिया और वापस वाराणसी लौट आये। 14 दिन बाद दोबारा पांचोें वहां फिर पहुँचे। शव का वैसे ही पड़ा देख पांचों ने दस लीटर तेजाब डाल दिया ताकि उनकी शिनाख्त न हो सके।
Submitted By: Shreedhar Tripathi Edited By: Deepak Yadav
