Saturday, April 11, 2026
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UP News : सरकार की सूची से गायब गरीबों के घरों के चूल्हे ठंडे

बांदा (हि.स.)।वैश्विक महामारी कोविड-19 कहर से गरीबों के घरों के चूल्हे ठंडे हैं। सरकार ने भले ही सभी परिवारों को निशुल्क राशन वितरण का एलान किया हो, परंतु बहुत से परिवार ऐसे हैं जिनके राशन कार्ड नहीं है और जो रोज कमाते खाते हैं। ऐसे परिवारों के नाम सरकार की सूची से गायब है। जिन्हें दो वक्त की रोटी मिलना आसान नहीं है।

ऐसे मजदूरों की दुर्दशा की दर्दनाक कहानी जब कुछ महिलाओं ने बयां की, तो सरकारी व्यवस्था तार-तार नजर आई। रविवार को अतर्रा क्षेत्र के कुछबंधिया डेरा में जब एक सामाजिक संस्था ने राशन वितरित किया तो राशन पाकर उनकी आंखें आंसुओं से भर गई। यहीं पर रहने वाली गुड़िया ने बताया कि उसका पति पांच दिन पहले काम की तलाश में घर से गया था, अभी तक वापस नहीं आया। घर में एक दाना नहीं है कि बनाकर बच्चों को खिला संकू। पति के अभी तक वापस न आने की चिंता और घर में भूख से बिलखते बच्चों को देखकर मेरे आंचल का वह दूध भी सूख गया है। जिससे पांच माह के अपने बेटे का पेट भर्ती थी। आज संस्था ने राशन दिया है, इससे खाना बनाकर पहले पेटभर के बच्चों को खिलाऊंगी और स्वयं जी भर के खा कर सुकून की नींद सोऊँगी।
 गुड़िया का पति संतोष मजदूरी करता है। गुड़िया के सात बच्चे हैं, सबसे छोटा बच्चा पांच माह का है। कोरोना की दूसरी लहर ने मानो गुड़िया की जिंदगी के सामने मुश्किलों की चट्टान खड़ी कर दी हो। कोरोना से पहले बीमारी, इसके बाद कही काम न मिलने से परिवार भुखमरी की कगार पर खड़ा हो गया। ऐसी ही कहानी शिव प्यारी, संतोष, अनुसूइया, कुन्नू , शिवपूजन और रामकृपाल की है। किसी के पास राशन कार्ड नहीं है किसी का पति कोरोना ने छीन लिया तो किसी का बेटा छीन लिया। आजीविका का आधार मजदूरी थी अब वह भी नहीं मिल रही है।
 जरूरतमंदों को जब आज विद्या धाम समिति ने श्रमिक भारती कानपुर के सहयोग से करीब 50 परिवारों को चिन्हित कर 15 किलो, आटा 5 किलो चावल, 4 किलो दाल, एक किलो शक्कर एक किलो तेल, सब्जी मसाला व  मास्क का वितरण किया तो सभी के चेहरे खुशी से खिल उठे। 
 विद्या धाम समिति के मंत्री राजा भैया का कहना है कि सरकार भले ही निशुल्क राशन वितरण का दावा करती है लेकिन जब बड़ी संख्या में लोगों के पास राशन कार्ड भी नहीं है तो उन्हें राशन कहां से मिलेगा। जबकि ऐसे ही गरीब परिवारों को राशन की जरूरत है। हमारी कोशिश है ऐसे जरूरतमंद परिवारों तक मदद पहुंचाई जाये। 
 इस अवसर पर श्रमिक भारती के निदेशक राकेश पांडे, नीरज सचान, मुवीना, शशि, मीरा राजपूत अर्चना, ठकु पुजारी, सुरेश, मातादयाल कुमार आदि मौजूद रहे।

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