मथुरा (हि.स.)। वृंदावन नगर में शुक्रवार उत्तर भारत के प्रमुख रंगनाथ मंदिर में बैकुंठ एकादशी मनाई गई। जिसमें ब्रह्ममुहूर्त में ही भक्तों ने बैकुण्ठपति भगवान गोदारंगमन्नार के सानिध्य में बैकुण्ठ द्वार में प्रवेश किया।
मान्यता है कि, इस पवित्र परंपरा का निर्वहन करने वाले आस्थावान भक्तों को भगवान के निज धाम बैकुण्ठ की प्राप्ति होती है। उत्तर भारत में रामानुज संप्रदाय के प्रमुख रंगनाथ मंदिर में प्रतिवर्ष धनुर्मास पर्यंत चलने वाले धार्मिक अनुष्ठानों के अंतर्गत एकादशी के पावन अवसर पर बैकुण्ठ द्वार खोला जाता है।
शुक्रवार को मंदिर सेवायतों के कंधों पर पालकी में सवार भगवान गोदारंगमन्नार जैसे ही बैकुण्ठ द्वार से निकले। भक्त उनका अनुसरण करते हुए परिक्रमा मण्डप तक पहुंचे। भगवान के यश, दयालुता और लीलाओं की सस्वर स्तुति करते हुए वेदवादी ब्राह्मण पालकी के पीछे-पीछे चल रहे थे। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर भगवान रंगनाथ के जयकारों से गुंजायमान रहा। हालांकि कोविड काल में सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क की अनिवार्यता को मंदिर और पुलिस प्रशासन द्वारा सजगता से सुनिश्चित किया गया।
मन्दिर के स्वामी रघुनाथ ने बताया कि 21 दिवसीय बैकुंठ उत्सव में 11 बैकुंठ एकादशी पर्व पर बैकुंठ द्वार खोला जाता है। यह एकादशी वर्ष की सर्वश्रेष्ठ एकादशियों में से एक मानी जाती है।
मन्दिर की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनघा श्री निवासन ने बताया कि अलवार आचार्य बैकुंठ उत्सव के दौरान अपनी रचित गाथाएं भगवान को सुनाते हैं। बैकुंठ एकादशी के दिन दक्षिण के सभी वैष्णव मन्दिरों में बैकुंठ द्वार ब्रह्म मुहूर्त में खुलता है। इसी परम्परा का निर्वाहन वृन्दावन स्थित रंगनाथ मन्दिर में किया जाता है।
UP News : वृंदावन रंगनाथ मंदिर : खुला बैकुण्ठ द्वार, गोदारंगमन्नार का हुआ अनुसरण
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