-पंडित कमलापति त्रिपाठी फाउंडेशन के तीन दिवसीय चिंतन शिविर का पहला दिन,कांग्रेस के नेताओं ने सरकार पर जमकर साधा निशाना
वाराणसी (हि.स.)। आज देश की दशा और दिशा आम लोगों से छुपी नहीं है। मौजूदा सत्ता देश के सभी मूलभूत सरकारी उपक्रमों को बेचने पर आमादा है। वर्तमान सरकार संवैधानिक, मौलिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की आजादी पर कुठाराघात के साथ अपनी फांसीवादी नीतियों को अब खुल्लमखुल्ला लागू कर रही है। अनियोजित लाकडाउन, नोटबंदी, जीएसटी, काले कृषि कानून आदि सरकार की नीयत के स्पष्ट हस्ताक्षर हैं। जनता मंहगाई से कराह रही है तो उसका आज विरोध देशद्रोह है। किसी को आतंकी घोषित कर देना इस सरकार का शगल है।
ये उदगार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधान परिषद सदस्य राजेशपति त्रिपाठी के है। त्रिपाठी रविवार को पंडित कमलापति त्रिपाठी फाउंडेशन की ओर से आयोजित तीन दिवसीय चिंतन शिविर के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे।
इंगलिशिया लाईन स्थित फाउंडेशन के सभागार में पूर्व एमएलसी ने कहा कि महात्मा गांधी ने आजादी दिलाई और नेहरू ने मजबूत लोकतंत्र की नींव रखी तो कांग्रेस ने 70 सालों में देश को सजाया और संवारा। आज हालात यह हो चली है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में ही लोकतंत्र खतरे में है।
शिविर में प्रोफेसर एन के मिश्रा ने कहा कि सांप्रदायिकता से सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस ही लड़ सकती है। वर्ष 2014 में कांग्रेस इसलिए हारी कि वह अपनी योजनाओं योगदानों को जनता के बीच नहीं ले जा पायी। नोटबंदी से बेरोजगारी बढ़ी यह सरकारी आंकड़ा है जिसे बिजनेस स्टैंडर्ड ने भी प्रमुखता से छापा था।
प्रो. मिश्र ने कृषि कानूनों की आलोचना कर इसकी खामियां गिनाई। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष विजय शंकर पाण्डेय ने शिविर के चौदह सूत्री विषयों को रखा। काशी की विभूति, स्वाधीनता सेनानी, मुखर पत्रकार पंडित कमलापति त्रिपाठी के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पण कर शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविर में पूर्व सांसद राजेश मिश्र, प्रो.सुधाकर मिश्र ,प्रो. सतीश राय,प्रोफेसर दीपायन आदि ने भी विचार रखा।चिंतन शिविर की अध्यक्षता प्रो. अनिल कुमार उपाध्याय और संचालन पुनीत मिश्रा ने किया।
शिविर में पूर्व विधायक अजय राय, अनिल श्रीवास्तव, प्रजानाथ शर्मा, सतीश चौबे, राजेश्वर पटेल, राघवेंद्र चौबे, संजीव सिंह, शैलेंद्र किशोर पाण्डेय मधुकर, डा. अनुराग टंडन, डा. क्षेमेन्द्र त्रिपाठी, रविशंकर पाठक आदि शामिल रहे।
