– उप-निरीक्षक ने अपनी सेवानिवृत्ति के तीन दिन पूर्व किया कारनामा
– उप निरीक्षक के खिलाफ एडीजी ने की कार्रवाई
गोरखपुर (हि.स.)। एक इनामी भू-माफिया को लाभ पहुंचाने की नीयत से तत्कालीन उप निरीक्षक व विवेचक ने एक ऐसा कारनामा किया, जिसकी वजह से उसकी पेंशन और ग्रेच्युटी रोक दी गयी है। उस पर क्षेत्राधिकारी को बिना विश्वास में लिए ही भू-माफिया की धाराओं को विलोपित करने का आरोप है। मामला संज्ञान में आने पर एडीजी अखिल कुमार ने सेवानिवृत्त उप निरीक्षक के खिलाफ यह कार्रवाई की है। पुनः विवेचना का आदेश भी दिया गया है। खजनी के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक भी निशाने पर हैं।
सेवानिवृत्त के तीन दिन पहले विवेचक प्रद्युम्न सिंह ने वांछित इनामी अभियुक्त को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से विवेचना को अल्पीकृत कर दिया। आरोप है कि तत्कालीन उप निरीक्षक प्रदुम्न सिंह ने सभी निर्देशों को दर-किनार किया और मामले में घोर लापरवाही बरती। आरोप है कि स्वेच्छाचारी उप निरीक्षक ने अभियुक्त व भू माफिया रविन्द्र निषाद को लाभ पहुंचाने के लिया क्षेत्राधिकारी की अनुमति भी नहीं ली। अभियोग से भारतीय दंड संंहित की धारा 307, 504 और 506 को विलोपित कर दिया। इस वजह से उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
बोले एडीजी
इस संबंध में गोरखपुर के एडीजी जोन अखिल कुमार का कहना है मामला गंभीर है। इस लापरवाह सेवानिवृत्त उप निरीक्षक के पेंशन व ग्रेजुएटी रोक दिया गया है। विभागीय कार्रवाई का निर्देश भी दिया गया है।
यह है मामला
8 मार्च 2021 को रामगढ़ थाना क्षेत्र के आजाद चौक की रहने वाली श्रीमती अनीता देवी पत्नी धर्मवीर ने अपर पुलिस महानिदेशक गोरखपुर जोन अखिल कुमार को एक शिकायती पत्र दिया। तत्कालीन खजनी थाना के थानाध्यक्ष के सहयोग से भू-माफिया रविन्द्र निषाद पर उनकी दीवार को गिराने की शिकायत की। जांच में रविद्र निषाद का एक आपराधिक इतिहास सामने आया और यह बात भी सही पाई गई कि वह भू-माफिया है। फिर खजनी थाना में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 47/21 में भारतीय दंड संहिता की सुसंगत धाराओं में रविन्द्र निषाद सहित 06 के खिलाफ गंभीर प्रकृति के आपराधिक कृत्य संबंधी मुकदमा दर्ज हुआ। अभियुक्तों की गिरफ्तारी के साथ रविन्द्र निषाद को भू-माफिया गैंग में पंजीबद्ध कर गैंगेस्टर की कार्रवाई हुई। इतना ही नहीं, धारा 14 (1) के तहत उसकी सम्पत्ति कुर्क कराने को निर्देश भी दिया गया था। फिर रविन्द्र निषाद पर 15 हजार का इनाम घोषित हुआ। बावजूद इसके तत्कालीन उप निरीक्षक और खजनी के प्रभारी निरीक्षक ने मामले में घोर लापरवाही बरती और विभागीय आदेश व निर्देशों के अनुपालन में शिथिलता दिखाई।
