पीसीएस की प्रारम्भिक परीक्षा-2021 में एक भी जिले में नहीं बनाया परीक्षा केन्द्र
करीब सवा दो सौ किमी दूर हरदोई जिले में परीक्षा देने जाएंगे गोण्डा के परीक्षार्थी
जानकी शरण द्विवेदी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा आगामी 24 अक्टूबर को आयोजित होने वाली पीसीएस की प्रारम्भिक परीक्षा-2021 में देवीपाटन मण्डल के बच्चों के साथ घोर अन्याय किया गया है। 75 जनपदों वाले राज्य के 31 जिलों में परीक्षा केन्द्र बनाए जाने के बावजूद देवीपाटन मंडल के एक भी जिले को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया है। आयोग का यह कृत्य न केवल राज्य के सर्वाधिक पिछड़े मण्डल के बच्चों को संविधान प्रदत्त ‘अवसर की समानता’ के अधिकार से वंचित करने जैसा है, अपितु यहां के जनप्रतिनिधियों के गाल पर भी करारा तमाचा है।
जानकारी के अनुसार, राज्य लोक सेवा आयोग ने आगामी 24 अक्टूबर को आयोजित होने वाली पीसीएस की प्रारम्भिक परीक्षा-2021 के लिए राज्य के कुल 31 जिलों को परीक्षा केन्द्र बनाया गया है, जिसमें सहारनपुर और बस्ती जैसे छोटे मण्डल से लेकर ज्योतिबा फुले नगर (अमरोहा) जिले तक शामिल हैं। जबकि अपने घनघोर पिछड़ेपन के कारण देवीपाटन मंडल के तीन जिलों बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती के भारत सरकार के आकांक्षी जनपदों की सूची में मौजूद होने के बावजूद मण्डल में कोई भी परीक्षा केन्द्र नहीं बनाया गया है। गोण्डा जनपद के निवासी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लगे गरीब बच्चों को आवागमन में होने वाली असुविधाओं समेत अन्य आर्थिक संकट को नजरंदाज करते हुए आयोग ने उन्हें हरदोई जनपद में परीक्षा देने के लिए भेजा है, जबकि पड़ोसी जिलों बस्ती, अयोध्या और बाराबंकी में भी परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि आयोग के अधिकारियों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान नकल को लेकर गोण्डा की धरती पर दिया गया उनका भाषण अक्षरशः आज भी याद है। किन्तु यदि उन्हीं की पार्टी की सरकार में आयोग ने गोण्डा जिले में नकल रहित परीक्षा सम्पन्न न करवा पाने के भय से यहां परीक्षा केन्द्र नहीं बनाया है, तो यह राज्य शासन और यहां तैनात अधिकारियों के क्षमता पर सवालिया निशान है। भारतीय संविधान भी सभी को अवसर की समानता की बात करता है, किन्तु बड़े शहरों व उसके आसपास रहने वाले बच्चों को परीक्षा देने के लिए उनके केन्द्र तक पहुंचने में एक तरफ जहां सुगमता होगी, वहीं गोण्डा जिले समेत मण्डल के बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती जिलों के बच्चों को केन्द्र तक पहुंचने में काफी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। गोण्डा जिले से करीब सवा दो सौ किमी दूर हरदोई के लिए सीधे रोडवेज की बसें भी उपलब्ध नहीं हैं।
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राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराने तथा उनको सुगमता प्रदान करते हुए शैक्षिक उन्नयन के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना संचालित कर रहे हैं, किन्तु यहां पर उनकी मंशा को भी नजरंदाज किया गया। इसके साथ ही आयोग का यह कृत्य सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुने गए जिले के दो सांसदों और सात विधायकों के लिए भी डूब मरने जैसी बात है, कि राज्य के तमाम छोटे जिलों को परीक्षा केन्द्र बनाए जाने के बावजूद देवीपाटन मण्डल को इससे वंचित रखा गया है। बताते चलें कि राज्य के जिन जनपदों में करीब छह लाख अभ्यर्थी परीक्षा देंगे, उनमें गोरखपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज, आजमगढ़, बस्ती, अयोध्या, लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ और सहारन पुर मण्डल मुख्यालय शामिल हैं। इसके अलावा बुलंदशहर, इटावा, मुजफ्फर नगर, शाहजहांपुर, गाजियाबाद, जौनपुर, रायबरेली, मथुरा, गाजीपुर, हरदोई, ज्योतिबाफुले नगर (अमरोहा), महाराजगंज, मैनपुरी, बाराबंकी, सीतापुर जैसे छोटे जिलों को भी परीक्षा केंद्र बनाया गया है, किन्तु देवीपाटन मण्डल की पूरी तरफ से उपेक्षा की गई है।
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