प्रादेशिक डेस्क
लखनऊ। बिजली कंपनियों द्वारा दरों को लेकर दाखिल प्रस्ताव पर नियामक आयोग इसी सप्ताह फैसला सुना सकता है। उपभोक्ता परिषद ने बिजली दरों को कम कराने के लिए एक बार फिर से लामबंदी शुरू कर दी है। उपभोक्ता परिषद ने कहा है कि राज्य सरकार घरेलू, ग्रामीण, शहरी व किसानों सहित छोटे वाणिज्यिक संस्थानों की बिजली दरों में कमी के लिए विद्युत नियामक आयोग को जनहित में निर्देश दे, जिससे कोरोना संकट में आम जनता को राहत मिल सके। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने एक बार फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से मांग की है कि आयोग बिजली दरें कभी भी घोषित कर सकता है। सरकार कोरोना संकट में उपभोक्ताओं व किसानों की बिजली दरों में कमी करना चाहती है, तो नियामक आयोग को विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 108 के तहत निर्देश देकर कोविड राहत टैरिफ लागू कराए। प्रदेश का उपभोक्ता बिजली दरों में कमी को लेकर काफी उम्मीद लगाए है। सरकार उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर निकल रहे 19537 करोड़ रुपये के एवज में इस बार उपभोक्ताओं को राहत का तोहफा दिलाए। उपभोक्ता परिषद ने कहा है कि पिछले वर्षों पर नजर डालें, तो प्रदेश में घरेलू, ग्रामीण व किसानों की बिजली दरें काफी बढ़ी हैं। महंगी बिजली देने वाले टॉप फाइव प्रदेशों में यूपी भी शामिल है।
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