लखनऊ (हि.स.)। भाकपा (माले) तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली सीमा पर पिछले 31 दिनों से जारी आंदोलन के समर्थन में यूपी में ’किसान गोलबंदी’ अभियान चलाएगी। 12 जनवरी तक चलने वाले अभियान की समाप्ति तहसील मुख्यालयों पर किसान प्रदर्शन से होगी।
यह जानकारी देते हुए पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने शनिवार को बताया कि अभियान के दौरान कार्यकर्ता टीमें बनाकर गांवों और किसानों के बीच जाएंगे। नए कृषि कानूनों व उनके परिणामों को लेकर उन्हें जागरूक करेंगे। किसान चौपालों, गोष्ठियों, नुक्कड़ सभाओं व बैठकों के माध्यम से यह किया जाएगा। इसके अलावा, कृषि कानूनों पर पर्चा और पुस्तिका भी जारी की गई है, जिसे किसानों को दिया जाएगा। उनसे सक्रिय समर्थन मांगा जाएगा ताकि किसान आंदोलन को मजबूती और व्यापकता मिले।
माले नेता ने कहा कि नए कृषि कानूनों के माध्यम से खेती में निजी पूंजी निवेश बढ़ाकर 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने का तर्क मोदी सरकार का एक और जुमला है। यह कहकर कि आंदोलनकारी किसान भ्रमित हैं, जबकि सरकार देश और दुनिया को भ्रमित कर रही है। किसानों को कोई गलतफहमी नहीं है कि तीनों कृषि कानूनों से फायदा पूंजीपतियों को होगा। ये कानून न सिर्फ खेती-किसानी को तबाह करेंगे और देश में अडानी-अंबानी का कंपनी राज लाएंगे, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को बर्बाद कर गरीबों का निवाला भी छीन लेंगे। इसलिए ये कानून न सिर्फ किसान बल्कि गरीब विरोधी भी हैं।
