Saturday, April 4, 2026
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UP News : मटर की फसल में लागत कम मुनाफा अधिक, किसानों की आय दूना करने में भी सहायक

-कम समय में पैदावार,अगेती और देर से होने वाली दोनों वेराइटी के उन्नत और हाइब्रिड बीज की मांग किसानों में बढ़ी

वाराणसी (हि.स.)। किसानों की आय दुगुनी करने में मटर की उन्नत किस्म की बीज भी सहायक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को साकार करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद शहंशाहपुर रोहनिया, गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर उत्तराखंड के साथ विभिन्न कम्पनियों के उन्नत किस्म के बीज बाजारों में उपलब्ध है।
 मटर की इन उन्नत किस्म की बीज से अगेती 60 से 65 दिन और देर से 90 दिन में तैयार होने वाली फसल के जरिये किसान अपनी आय आसानी से बढ़ा सकते हैं। मटर की फसल के बाद जनवरी माह में किसान देर से तैयार होने वाले गेहूं या प्याज की बुवाई भी तैयार खेतों में कर सकते है।
वाराणसी सहित पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों में अक्टूबर माह के तीसरे या चौथे सप्ताह से लेकर नवम्बर माह तक मटर की बुवाई होती है। पूर्वांचल में पंतनगर विश्वविद्यालय उत्तराखंड से तैयार मटर के बीज एपी-3 प्रजाति की मांग अधिक है। 120 रूपये प्रति किग्रा की दर से बाजार में बीज उपलब्ध है। 
  बीज व्यवसाय से जुड़े जगतगंज स्थित किसानघर के संचालक राजन राय ने मंगलवार को ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से बातचीत में बताया कि एक बीघा मटर की बुवाई में 40 किग्रा बीज लगता है। दो किलो प्रति बिस्वा बुवाई में बीज प्रयोग होता है। पंतनगर के बीज एपी-3 से लगभग 65-70 दिन में मटर की फली तैयार हो जाती है। 
उन्होंने बताया कि मौसम अनुकूल रहा तो प्रति बीघा 25 से 30 कुन्तल फसल इस बीज से तैयार हो जाती है। दूसरी प्रजाति के उन्नत बीज में गोल्डेन कंपनी का बीज है। न्यूजीलैंड बेस कम्पनी का बीज 130 रूपये किग्रा के दर से उपलब्ध है। लेट वेराइटी के इस बीज से 90 दिन में फसल तैयार होती है। इससे 35 कुंतल प्रति बीघा पैदावार किसानों को मिलती है। 
  उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड बेस कंपनी के बीज के देशी तकनीक से बना बीज भी उपलब्ध है। इसमें भी वहीं खूबियां है। मटर की इन दोनों उन्नत वेराइटियों के बीज की काफी मांग है। अगेती किस्म के बीज से फसल तैयार होने के बाद किसान इसे बेचकर खाली होते है। तब तक गोल्डेन बीज से बोई गई फसल भी तैयार हो जाती है। 
 उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद शहंशाहपुर ने भी दो वेराइटी काशी उदय और काशी नंदिनी बीज बाजार में उपलब्ध कराया है। दोनों वेराइटी का बीज 120 रूपये प्रति किग्रा है। काशी उदय बीज अगेती किस्म का बीज है। इससे फसल लगभग 60 दिन में तैयार होती है। इस बीज से 20 से 25 कुंतल प्रति बीघा मटर की फली तैयार होती हैं। इसी तरह काशी नंदिनी, काशी मुक्ति, काशी अगेती बीज से फसल 60 से 75 दिनों में तैयार होती है। इसकी भी उपज प्रति बीघा 25 से 30 कुंतल है। सफल कंपनी का एपी-3 बीज हैं। इससे तैयार होने वाले मटर को कम्पनी वर्ष पर्यंत बेचती है। अन्य कम्पनियों के बीज में करिश्मा, चमत्कार, हाइब्रिड बीज, रचना, इंद्र, शिखा, पंत मटर, मालवीय मटर-2 और मालवीय-15 आदि है। राजन राय ने बताया कि मटर के फसल की कम से कम दो बार सिंचाई होती है। जाड़े में वर्षा न हो तो फसल में फूल आने के समय एक सिंचाई करना चाहिए। दाना भरते समय दूसरी सिंचाई लाभप्रद होती है।
उन्होंने बताया कि धान (खरीफ) की फसल की कटाई के बाद भूमि की जुताई करके पाटा लगाकर खेत तैयार करनी चाहिए। मटर के बीजों के अच्छे अंकुरण के लिए खेत के मिट्टी में नमी होना जरुरी है। मटर के फसल में आमतौर पर 20 किग्रा, नाइट्रोजन एवं 60 किग्रा फास्फोरस बुआई के समय देना होता है। इसके लिए 100-125 किग्रा. डाईअमोनियम फास्फेट (डीएपी) प्रति हेक्टेयर दिया जा सकता है। पोटेशियम की कमी वाले क्षेत्रों में 20 कि.ग्रा. पोटाश दिया जा सकता है। अन्य फसलों के मुकाबले इसमें खाद भी कम लगती है। लागत भी कम आता है। मटर की खेती से कम समय में पैदावार प्राप्त की जा सकती है। 

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