-युवा आईएएस अफसर के अभिनव प्रयोग से चेहरों पर आई मुस्कान
कुशीनगर (हि.स.)। युवा आईएएस अफसर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट पूर्ण बोहरा के एक प्रयोग के चलते हाशिए पर जीवन जी रहे कुशीनगर के मुसहर समुदाय के बच्चों के हाथ में मछली पकड़ने का कांटा-छड़ी नहीं बल्कि कलर व ब्रश दिख रहा है। प्रथम फेज में 15 दिन के प्रशिक्षण में 10 बच्चों को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने प्रशिक्षित कराते हुए न केवल प्रमाणपत्र जारी किया है बल्कि स्वयं के स्तर से पहल कर रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं।
कसया तहसील के मैनपुर, डेलीहवा, खदही आदि गांवों में काफी संख्या में मुसहर समुदाय के परिवार बसे हैं। परिवार के लोग खेतों में मजदूरी, घोंघा सीपी पकड़ने, चूहों के बिल खोदकर अन्न निकालने, चूहों का शिकार करने, भिक्षाटन व मछली मारने का कार्य कर भरण पोषण करते हैं। कार्यभार ग्रहण करने के बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट बोहरा क्षेत्र भ्रमण के दौरान मुसहर बाहुल्य गांव में गए तो उनके जीवन शैली से परिचित हुए। समुदाय के लोगों खासकर युवा वर्ग को शिक्षा से दूर पाया। वह तालाब में घोंघा और मछली पकड़ते दिखे। महिलाएं देशी शराब बनाते मिली। युवा अधिकारी ने इन्हें विभिन्न कौशल कलाओं की ट्रेनिंग दिलाकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की योजना बनाई। इन परिवारों के बच्चों को गरीबी और अशिक्षा से उबारने के लिए युवा आईएएस अफसर ने पहल की और उनके हाथों में ब्रश पकड़ाने की ठानी।
एसडीएम ने गोरखपुर में चित्रकारी की ट्रेनिंग देने वाली संस्था शांडिल्य एसोसिएट के प्रशिक्षक राकेश मणि त्रिपाठी व गंगेश्वर दत्त पांडेय से सम्पर्क कर उन्हें मुसहर बच्चों को ट्रेनिंग दिलाने का जिम्मा सौंपा। 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद समुदाय के 10 बच्चे कलर मिक्सिंग, पेंटिंग और वॉल पेंटिंग में दक्ष हो गए हैं। सभी प्रशिक्षित बच्चों को प्रमाण पत्र वितरित किया गया। शीघ्र ही द्वितीय फेज के लिए 10 और बच्चों का चयन होगा। उन्हें वाहन चालक, कुम्हारी कला और हस्त कला का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन बच्चों को दिलाई गई है ट्रेनिंगमुसहर समुदाय के बच्चों को स्वावलंबी बनाने के लिए प्रथम फेज में मैनपुर गांव के डेलीहवा और खदही पुरवा के राकेश, रामप्रवेश, सचिन, रिशु प्रसाद, वासुदेव, छोटेलाल, मन्नू प्रसाद, कृष्णमोहन, राजू और एक युवती दुर्गा सहित 10 बच्चों को प्रशिक्षित किया गया है।
प्रयोग को दिया जाएगा वृहद रूपज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि मुसहर समुदाय के लोग आज भी अशिक्षा के कारण विकास की मुख्यधारा से कटे हुए हैं। उन्हें खासकर युवाओं को स्वावलंबी बनाकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रयास किया गया है। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो इसे और व्यापक स्तर दिया जाएगा। समुदाय के युवक-युवतियों को विभिन्न तरह के प्रशिक्षण दिलाकर प्रशासन उन्हें रोजगार मुहैया कराने में भी मदद करेगा।
