प्रयागराज (हि.स.)। हमारे देश में रोग प्रतिरोधक क्षमता वर्धक अनेक वनौषधियां उपलब्ध हैं, यदि इनका समुचित उत्पादन, भण्डारण एवं संरक्षण किया जाये तो न केवल अपने देश में अपितु वैश्विक स्तर पर इनकी आपूर्ति की जा सकती है।
यह बातें वन अनुसंधान केंद्र के प्रमुख डॉ.संजय सिंह ने गुरुवार को माघ मेला स्थित पारि-पुनर्स्थापन वन अनुसंधान केंद्र के वन चेतना शिविर में विश्व आयुर्वेद मिशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘‘रोग प्रतिरोधक क्षमता वर्धक प्रमुख वनौषधियां-उत्पादन संरक्षण एवं चिकित्सीय प्रयोग“ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में सम्बोधित करते हुए कहा। उन्होंने भारत को अमूल्य वन सम्पदा का भण्डार बताया।
धन्वन्तरि हर्बल्स के सौजन्य से आयोजित कार्यक्रम में विश्व आयुर्वेद मिशन के अध्यक्ष प्रो.डॉ. जी.एस तोमर ने वर्तमान परिदृश्य में इम्युनिटी बढ़ाने वाली हर्बल औषधियों की आवश्यकता एवं उपयोगिता पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कोरोना कालखण्ड में गिलोय, तुलसी, अश्वगंधा, शतावर, मुलहठी, अदरक एवं आँवला आदि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुणों से हमारे देश के ही नहीं सम्पूर्ण विश्व के लोग परिचित हो चुके हैं। इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता कि आने वाले समय में इसी प्रकार के अन्य वायरस पुनः हमारे लिए संकट पैदा कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में हमारी इम्युनिटी ही हमारे स्वास्थ्य की रक्षा कर सकती है। आयुर्वेद में इस प्रकार की औषधियों की भरमार है जो वर्तमान परिदृश्य में हमारे लिए संजीवनी सिद्ध हो सकती हैं।
पूर्व आयुक्त आर.एस वर्मा ने आयुर्वेदीय वनौषधियों की कार्यकारिता पर अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए इन्हें आज के परिवेश हेतु अत्यंत आवश्यक एवं उपयोगी बताया। माघमेला प्रभारी डॉ. विवेक चतुर्वेदी ने कहा इम्युनिटी वर्धक हर्बल औषधियों की कोरोना महामारी के दौरान वैश्विक मांग को देखते हुए इनके गुणवत्ता पूर्ण उत्पादन, भण्डारण एवं औषधि निर्माण द्वारा विश्व बाजार के माध्यम से अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की जा सकती है। वनौषधि विशेषज्ञ एवं प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.अवनीश पाण्डेय ने महत्वपूर्ण रोग प्रतिरोधक क्षमता वर्धक औषधियों के गुण कर्मों की विस्तृत चर्चा की।
डॉ.कुमुद दुबे ने एण्टी ऑक्सीडेन्ट न्यूट्रास्युटिकल्स युक्त पौधों पर चर्चा करते हुए रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में इसके महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ.अनीता तोमर ने रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए प्रयोग में आने वाली वनौषधियों से अवगत कराते हुए इसके उत्पादन व संरक्षण पर चर्चा की। वैज्ञानिक डॉ.अनुभा श्रीवास्तव ने रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहजन के महत्व एवं उपयोग पर प्रकाश डाला। विश्व आयुर्वेद परिषद काशी प्रांत के अध्यक्ष डॉ. पी.एस पाण्डेय ने पोस्ट कोरोना पीरियड में आयुर्वेदीय औषधियों की आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ. बी.एस रघुवंशी, डॉ.सुधांशु उपाध्याय एवं डॉ. एम.डी दुबे ने भी अपने अनुभव साझा किए।
