प्रयागराज (हि.स.)। पौष पूर्णिमा के अवसर पर भगवान वेणी माधव की शोभायात्रा दारागंज में पूरी धूमधाम से निकली। आगे नगर देवता बजरंगबली की प्रतिमा अगुआई कर रही थी, तो पीछे भगवान भक्तों को दर्शन देते निकले। जहां-जहां भगवान की यात्रा निकली वहां लोगों ने जयकारे लगाए। घरों की छतों से फूल बरसाकर भगवान का स्वागत किया। रथ पर विराजमान भगवान की एक झलक पाने और प्रसाद पाने की लोगों में होड़ रही।
गुरूवार की दोपहर एक बजे वेणी माधव भगवान की शोभायात्रा मंदिर से निकली। सांसद फूलपुर केशरी देवी पटेल, जूना अखाड़े के संरक्षक महंत हरिगिरि, वेणी माधव मंदिर के प्रमुख आचार्य डॉ. वैभव गिरि, अखिल भारतीय दंडी सन्यासी परिषद के संरक्षक स्वामी महेशाश्रम, अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम, किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने भगवान के रथ पर सवार होते ही उनकी आरती उतारी। इस दौरान लगातार शंख ध्वनि बजती रही। शोभायात्रा निराला चौक के रास्ते कच्ची सड़क, बक्सी बांध, बक्सी कला के रास्ते नागवासुकी मंदिर पहुंची। जहां भगवान वेणी माधव और नागवासुकी का मिलन हुआ। यात्रा में सबसे आगे हनुमानजी की प्रतिमा थी। इसके बाद गुरु प्रतिमा और पीछे रथ पर भगवान विराजमान थे। युवतियों ने इस दौरान कलश यात्रा भी निकाली। ढोल नगाड़े की धुन पर लोगों ने भगवान का स्वागत किया।
रक्षा का दिया था वचनवेणी माधव मंदिर के प्रमुख आचार्य डॉ. वैभव गिरि ने बताया कि मान्यता है कि सृष्टि की रचना जब ब्रह्माजी ने की तो भगवान नारायण को नींद से जगाया गया। पहला यज्ञ प्रयाग की धरती पर हुआ। देव-दनुज-नर और किन्नर ने भगवान नारायण से प्रार्थना की कि वे प्रयागराज में माधव स्वरूप में रहकर यहां की रक्षा करें। भगवान प्रसन्न हुए और उन्होंने 12 रूपों में प्रयागराज की हर ओर से रक्षा का वचन दिया। यही कारण है कि प्रयागराज में द्वादश माधव हैं। माघ महीने में भगवान मंदिर से निकलकर वापस यहीं आते हैं। माना जाता है कि भगवान पूरे माघ मेले की रक्षा करते हैं।
