– बेसिक शिक्षा परिषद ने किया प्रेरणा ज्ञानोत्सव समारोह का आयोजन
मीरजापुर (हि.स.)। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से प्रेरणा ज्ञानोत्सव समारोह का आयोजन नवोदय विद्यालय पटेहरा में किया गया। मुख्य अतिथि ऊर्जा राज्यमंत्री रमाशंकर सिंह पटेल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने कहा कि विद्यालय का कायाकल्प एवं बच्चों के अंदर गुणात्मक सुधार तथा पूर्ण बंदी के दौरान जो बच्चे साल भर विद्यालय में नहीं आए, उन्हें 100 दिन का कैम्पेन करके बच्चों में शिक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना है। इससे बच्चों का शिक्षा स्तर ऊपर उठ सकेगा। ऐसे बच्चे जो प्रेरणा लक्ष्य को पूरा कर लिए हैं, उनको मुख्य अतिथि ने प्रमाण पत्र वितरित किया। साथ ही ऐसे अध्यापक जो प्रेरणा लक्ष्य को पूर्ण करने में अपना योगदान दिया, उन अध्यापकों को भी प्रमाण पत्र वितरित किया।
अब परिषदीय विद्यालय के बच्चों को सीधे खाते में मिलेगी ड्रेस की कीमत
ऊर्जा राज्यमंत्री ने कहा कि सरकारी कामकाज में पूरी पारदर्शिता लाने के प्रयासों में जुटी सरकार ने एक और बड़ा फैसला किया है। अब परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ड्रेस की कीमत सीधे उनके खाते में भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस निर्णय से प्रदेश के एक लाख 58 हजार से अधिक परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 1.58 करोड़ बच्चों को लाभ होगा। वे मनचाही जगह से कपड़ा लेकर उसे सिलवा सकेंगे। सरकार हर बच्चे को प्रतिवर्ष दो यूनिफार्म देती है। यूनीफार्म का मूल्य 300 रुपये तय है तो जूते के लिए 135 रुपये, मोजा 21 रुपये और स्वेटर के लिए 200 रुपये। पठन-पाठन सामग्री पर सरकार करीब साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये सालाना खर्च करती है।
बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का संवैधानिक अधिकार
सर्व शिक्षा अभियान की शुरुआत 2000-01 में प्राथमिक शिक्षा के ढांचे को दुरुस्त करने के लक्ष्य को लेकर हुई थी। इसके तहत हर बच्चे को नि:शुल्क शिक्षा देकर उनका जीवन संवारना था। गांवों में एक किलोमीटर के दायरे में प्राथमिक और तीन किलोमीटर के दायरे में उच्च प्राथमिक विद्यालय बनवाना था। इसी कड़ी में बच्चों को ड्रेस, बस्ता, जूते-मोजे और किताबें भी मुफ्त में दी जाती हैं। अब तो छह से 14 साल तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का संवैधानिक अधिकार भी हासिल है। लेकिन 21 वर्ष बाद भी यह मिशन लक्ष्य से दूर है तो इसके लिए कर्ता-धर्ता ही जिम्मेदार हैं। ड्रेस, जूते-मोजे का मूल्य बच्चों या उनके अभिभावकों के खाते में सीधे भेजने से न सिर्फ पारदर्शिता आएगी, बल्कि कपड़े की गुणवत्ता या नापजोख पर उठते सवाल भी ठंडे पड़ जाएंगे।
कार्यक्रम का संचालन ओमप्रकाश सिंह ने किया। इस अवसर पर नवोदय विद्यालय के प्राचार्य एन चंद्रा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गौतम प्रसाद, बेचन सिंह, राजेश सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी राम मिलन यादव, बीडीओ दिनेश कुमार मिश्र, रामपोष सिंह आदि रहे।
