वाराणसी (हि.स.)। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए धन संग्रह को लेकर संतों की बैठक में भाग लेने के लिए विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय शुक्रवार को वाराणसी पहुंच गये।
अखिल भारतीय सन्त समिति की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेने के पूर्व उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान काशी मथुरा से जुड़े सवाल को टालते हुए उन्होंने कहा कि जब तक एक मंदिर समाज को समर्पित नहीं होता, कुछ और नहीं। अच्छा समाज और बुद्धिमान वो माने जाते हैं जो पहले एक काम पूरा करे, फिर सुस्ताए और फिर आगे की सोचे। इंगलिशिया लाइन स्थित विहिप के कार्यालय में उन्होंने साफ संकेत दिया कि पहले राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा कराना है।
उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए सभी भारतीयों से दान की अपील कर कहा कि अब तक 80 से 85 करोड़ रुपया ट्रस्ट को मिल चुका है। उन्होंने बताया कि जो लोग ये समझते हैं कि भगवान् राम उनके पूर्वज थे और बाबर से उनका कोई सम्बन्ध नहीं था, ऐसे मुस्लिम परिवार भी मंदिर निर्माण के लिए धन दे रहे हैं। एक सवाल के जबाब में उन्होंने कहा कि सरकार से हम लोगों को एक रुपया नहीं चाहिए। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 11 लाख अपने निजी खाते से दिया है और देश के राष्ट्रपति ने भी धन देने को कहा है। श्रीराम मंदिर में बलिदानी कारसेवकों के स्मारक बनाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि देश में कभी बलिदानियों के समारक नहीं बनते, पर अब बनने लगा है । सभी बलिदानियों का नाम लिखना कठिन है, तो भी हम इस पर सोचेंगे।
संतों की बैठक में दिग्गज संत शामिल होंगे
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर विशाल एवं भव्य मंदिर के निर्माण में दुनिया भर के हिन्दुओं का अंशदान हो सके, इसके लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास और अखिल भारतीय सन्त समिति की दो दिवसीय बैठक शनिवार से दुर्गाकुण्ड स्थित श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार अन्ध विद्यालय में आयोजित है। बैठक में धन संकलन अभियान को लेकर रणनिती बनेंगी।
बैठक में ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती,, निर्मल अखाड़े के श्रीमहन्त ज्ञानदेव सिंह , जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभाष्कर , स्वामी परमानन्द गिरि , महामंडलेश्वर अलख गिरि , स्वामी विवेकानंद महाराज, महन्त फूलडोल बिहारीदास , स्वामी धर्मदेव, महन्त कमलनयन दास , आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानन्द गिरि , महामंडलेश्वर अनन्तदेव गिरि , स्वामी देवेन्द्रानन्द गिरि , कालिका पीठाधीश्वर महन्त सुरेन्द्रनाथ अवधूत , महामण्डलेश्वर जनार्दन हरि , स्वामी हंसानन्द तीर्थ , महामण्डलेश्वर स्वामी मनमोहनदास , ब्रह्मर्षि अंजनेशानन्द सरस्वती , स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती, स्वामी दिव्यानंद सरस्वती , महामंडलेश्वर ज्योतिर्मयानंद गिरि , महामंडलेश्वर ईश्वरदास , राधे बाबा निर्मोही, शक्ति शांतानंद महर्षि , महामण्डलेश्वर अनुभूतानन्द गिरि, गौरीशंकर दास , महन्त बलराम दास हठयोगी, डॉ. श्यामदास , स्वामी वियोगानंद सरस्वती , महन्त राधामोहन दास समेत कई सन्त भाग ले रहे है।
