बांदा (हि.स.)। शहर कोतवाली अंतर्गत पुलिस चौकी के पुलिसकर्मी अगर सिपाही के शिकायत पर तत्काल एक्शन ले लेते तो शुक्रवार देर रात सिपाही, उसकी बहन और मां की हत्या न होती। इस तिहरे हत्याकांड के लिए पुलिस चौकी के स्टाफ को जिम्मेदार माना जा रहा है।
इस घटना में गंभीर रूप से घायल अभिजीत का अभिन्न मित्र नेटवर्क इंजीनियर दिलीप चश्मदीद गवाह है। उसके मुताबिक, दोनों परिवारों के बीच जूठन डालने के विवाद में एक दिन पहले झगड़े की शुरुआत हुई थी। अभिजीत और देवराज के परिवारों के बीच काफी समय से विवाद चल रहा है। दोनों का घर अगल-बगल होने के कारण नाली में कूड़ा फेंकने को लेकर अक्सर दोनों परिवार आमने सामने आ जाते थे। अभिजीत और उसका भाई सौरभ दोनों का पुलिस विभाग में चयन हो जाने के बाद देवराज परिवार उनसे और ज्यादा खुन्नस रखने लगा था।
आरोपित देवराज के भाई शिवपूजन की बेटी संध्या की शादी डिघवट में हुई है। वह शुक्रवार की सुबह अपने घर आई हुई थी। इधर, अभिजीत भी छुट्टी लेकर शुक्रवार को सुबह घर पहुंचा था। संध्या के आने की खुशी में रात में खाने में गोश्त बना। इसके बाद इसकी जूठन संध्या ने नाली में डाल दी। उसी को लेकर अभिजीत ने विरोध किया।
दिलीप के मुताबिक इसी बात को लेकर झगड़े की शुरुआत हुई। दोनों पक्षों से गाली गलौच के कारण अभिजीत ने उससे कहा चलो इस मामले की शिकायत पुलिस चौकी में कर दें, तब वह उनके साथ पुलिस चौकी गया था। अभिजीत की मां रामावती की ओर से अलीगंज पुलिस चौकी में लिखित तहरीर दी गई थी। साथ ही अभिजीत ने कोतवाली प्रभारी दिनेश सिंह से मिलकर भी इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन, पुलिस ने इसे हल्के से लिया।
दिलीप के मुताबिक, अभिजीत को अंदेशा था कि कहीं वह लोग कोई बड़ी घटना को अंजाम न दे इसलिए वह उसे लेकर दोबारा रात में पुलिस चौकी पहुंचा और पुलिसकर्मियों से बड़ी घटना की आशंका जतायी। इस पर चौकी के पुलिसकर्मियों ने अभिजीत को समझाया कि वह पुलिस विभाग में है, कोई कार्रवाई करने पर उस पर आरोप लगेगा कि वह अपने पद का दुरुपयोग कर रहा है। इसलिए वह शांत रहे,अब दूसरा पक्ष कोई घटना को अंजाम नहीं देगा।
दिलीप ने बताया कि पुलिस द्वारा उन्हें वापस करने पर वह अभिजीत के साथ घर आया तभी देवराज के घर की एक महिला अभिजीत से आकर लिपट गई और अचानक कुल्हाड़ी लाठी डंडे से देवराज के परिवार ने उन लोगों पर हमला कर दिया। दिलीप के मुताबिक उसने अभिजीत को बचाने की कोशिश की, तो उस पर भी कुल्हाड़ी और डंडे से हमला कर दिया। घायल होने के बाद वह भी अपने घर की तरफ भागा और अपने भाइयों को घटना की जानकारी देकर कहा कि किसी तरह अभिजीत की जान बचा लो। इसके बाद उसके परिवार के लोग उसे अस्पताल लेकर आ गए और उधर देवराज और उसके भाइयों ने लाठी-डंडा, साबड़-हथौड़ा और कुल्हाड़ी से परिवार पर हमला कर मां रामावती, अभिजीत व उसकी बहन तीनों को मौत के घाट उतार दिया। देवराज मृतक सिपाही के ताऊ का ही बेटा है।
