प्रयागराज (हि.स.)। परम्परागत लोक कला भारत देश की संस्कृति विरासत है, जिसे संभालने की आवश्यकता है। आज के चकाचौंध जीवन में हमारी परम्परागत लोक कलाएं क्षेत्रवार विलुप्त हो रही हैं। जिसको संजोने एवं संवारने की पहल नवयुवक एवं नव युवतियों को करना चाहिए।
यह बातें हड़िया, प्रयागराज के पूर्व विधायक प्रशांत सिंह ने रविवार को बरौत हड़िया में संस्थान श्रम जीवी सेवा समिति दमदमा सैदाबाद के तत्वावधान एवं संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से पांच दिवसीय परम्परागत लोक कला उत्सव में व्यक्त किया। उन्होंने आगे कहा कि परम्परागत लोक कलाओं को आगे ले जाने के लिए भारतीय समाज में गुरु शिष्य परम्परा के द्वारा अपने आप आगे बढ़ती आई है। हॉलीवुड, बॉलीवुड की कलाओं से भारत देश की लोक कला पर मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ रहा है। जिससे अपने अस्तित्व की पहचान बनाने में असमर्थ है।
विशिष्ट अतिथि लोक कलाकार लाल बहादुर रागी ने कहा की भौतिकता के चलते लोक कलाएं अपने आप को असहाय महसूस कर रही हैं। पश्चिमी सभ्यता हमारी भारती लोक कलाओं पर कुठाराघात कर रही हैं। परम्परागत लोक कलाओं के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था किया जाना चाहिए। जिससे नए कलाकारों की प्रतिभा को निखारा एवं संवारा जा सके।
लोक कलाकार संत लाल ने कहा कि कजरी, चनैनी, आल्हा जैसी लोक कलाओं में फूहड़पन आ गया है। परम्परागत लोक कलाएं अपने उद्देश्यों से भटक गई हैं। भारत देश के समस्त शुभ कार्य लोक कला गीतों के शुभारम्भ से किया जाना अपने आप में अनोखा है। लोक कला में भारतीय संस्कृति की जीवन रेखा है। शादी विवाह, कृषि कार्य एवं समस्त दैनिक कार्य लोक कला माध्यम से सम्पन्न किया जाना शत-प्रतिशत सफल संस्कृति की परिचायक है।
लोक कलाकार संजय कुमार यादव ने कहा कि लोक कलाओं में प्रशिक्षण के लिए सरकारें एवं कलाकारों को आगे आना होगा। जिससे प्रशिक्षित लोक कलाकार शत-प्रतिशत प्रस्तुतियां देने में कुशल होंगे। लोक कला को आर्थिक परिवेश के साथ जोड़ने का प्रयास होना चाहिए। कहा कि आज लोक कलाकारों की आर्थिक स्थिति बड़ी दयनीय है। प्रगति के दौर में लोक कलाकारों की प्रासंगिकता समाप्त हो गई है।
इसी कड़ी में जय लाल प्रजापति, उमा चरण, राजबली गौतम, राम बाबू भारतीय, श्यामलाल, ममता सागर, सुमंत्र लाल, राजेश कुमार, इन्द्र पटेल, दीना नाथ हंसमुख, स्वदेश कुमार, मंजीत कुमार, शेषधर बिंद, अमरजीत, हरिश्चन्द्र, फिरोज, राजकुमार ने शानदार प्रस्तुति देकर लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया। अंत में संस्थान सचिव लालजी सिंह ने सभी प्रतिभागियों एवं लोक कलाकारों का आभार प्रकट कर कहा कि लोक कलाकारों को संरक्षित एवं सुसज्जित करने की महती आवश्यकता है।
