-होने लगी लैंडस्केपिंग, बिछ रही लेमन ग्रास
-बुद्धकालीन नदी को पर्यटन के अनुरूप बनाने की कवायद तेज
कुशीनगर (हि. स.)। हिरण्यवती ‘कुशीनगर की गंगा’ ही है। स्वयं गौतम बुद्ध ने महापरिनिर्वाण के पूर्व नदी जल से आचमन कर इसे सदैव के लिए गंगा सरीखा पूज्यनीय बना दिया। दशकों से उपेक्षित इस नदी को प्राकृतिक स्वरूप प्रदान करने के लिए प्रशासन व लोग सक्रिय हुए तो नदी का सौंदर्य निखरने लगा है। योजना नदी को पर्यटन के अनुरूप विकसित किये जाने की है।
इस क्रम में लैंडस्केपिंग का कार्य शनिवार को शुरू कर दिया गया। किनारों की जमीन के आकार व स्वरूप को व्यवस्थित कर नेचुरल लेमन ग्रास बिछाई जा रही है। नदी तट पूर्व में सीढ़िया बनाई जा चुकी हैं। कसाडा व नगरपालिका यहां लाइटिंग, बैठने का स्थान, पेयजल, प्रसाधन, स्वच्छता आदि की भी सुविधाएं मुहैया करा रहा है। नदी में बोटिंग भी शुरू हो गई है।
कुशीनगर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (कसाडा) व नगरपालिका शहर को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन के अनुरूप सुंदर व स्वच्छ दिखने की योजना पर कार्य कर रहा है। तीन हिस्सों में बांटकर कार्य चल रहा है। कुशीनगर-देवरिया मार्ग पर रामाभार स्तूप के समीप नदी तट पर बुद्धाघाट, कसया-गोरखपुर मार्ग पर करुणासागर घाट और कसया देवरिया मार्ग पर हिरण्यवती घाट को विकसित किया जा रहा है। हिरण्यवती घाट शवदाह के लिए प्रयुक्त होता है। पूर्व में इसकी स्थिति जीर्ण शीर्ण थी। पुल के दोनों तरफ से लोग नदी में अपशिष्ट व गन्दगी फेंकते थे। यहां नदी जल का प्रवाह भी अवरुद्ध हो गया था। कसाडा व नपा की टीम ने नदी की साफ सफाई कराकर न केवल जल प्रवाह ठीक कराया बल्कि इस स्थल को खूबसूरत बनाने की भी ठानी। इसी क्रम में लैंडस्केपिंग का कार्य शुरू हो गया। अब स्थल की खूबसूरती और निखर उठी है। बरसात के दौरान यहां सघन पौधरोपण की योजना है। जल्द बढ़ने व खूबसूरत आकार लेने वाले पौधे रोपित किये जायेंगे। जिससे नदी व घाट से गुजरने व शवदाह के लिए आए लोगों को पूरी तरह सुरम्य व रमणीक वातावरण की अनुभूति हो।
शहर को सुंदर बनाना सबकी जिम्मेदारी
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट पूर्ण बोरा ने बताया कि शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने की जिम्मेदारी यहां के हर नागरिक की है। लोग हिरण्यवती नदी में कत्तई अपशिष्ट,कूड़ा आदि न फेंके। यही सबसे बड़ा सहयोग है।
