बांदा (हि.स.)। जनपद के ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग के जंगल में लगी आग दूसरे दिन भी नहीं बुझ पाई। बुधवार को यूपी के हिस्से में लगी आग तेजी से जंगल में फैल रही है। अभी तक आग बुझाने के लिए प्रशासन की ओर से किसी तरह के इंतजाम नहीं किए गए।
इस महीने यह तीसरी बार आग लगी है। सबसे पहले 21 मार्च को आग ने तबाही मचाई थी और 11 दिन के बाद मंगलवार को एक बार फिर आग की लपटें देखकर लोगों में अफरा-तफरी मच गई। वहीं आज बुधवार को दुर्ग के यूपी वाले हिस्से में कटरा कालिंजर के पास से निचले हिस्से में आग लगी और तेजी से पूरे जंगल में फैलती चली गई और आग दुर्ग के मृगधारा तक पहुंच गई है।
बताते चलें कि मंगलवार को कालिंजर दुर्ग के जंगल में आग की लपटों ने जमकर कहर बरपाया। सैकड़ों पेड़ आग से जल गए। झाड़-झाड़ियां होने के चलते लपटों ने जोर पकड़ लिया। तेज हवा के चलते आग ने विकराल रूप ले लिया था। आग यूपी के हिस्से में नीचे की तरफ जंगल में लगी, जो दक्षिण दिशा से किले की ओर तेजी से बढ़ती गई। दोपहर तक फायर ब्रिगेड का दस्ता भी नहीं पहुंचा था।
राजा अमान सिंह महल के पीछे मृग धारा, मंडूक भैरव, रानी महल आदि के चारों तरफ धुआं का गुबार और लपटें नजर आने लगीं। सूचना के घंटों बाद तक दमकल की गाड़ियां नहीं पहुंची हैं। पुरातत्व विभाग के कर्मचारी भी पानी की कमी से बेबस नजर आए। वन विभाग का भी कोई अधिकारी व कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। पुरातत्व विभाग के कर्मियों का कहना है कि इस आग से जंगली जीव-जंतुओं सहित भारी वन सपंदा के नष्ट होने की संभावना है।
इस बारे में कालिंजर शोध संस्थान के निदेशक अरविंद छिरोलिया ने बताया कि मंगलवार को दुर्ग के पिछले हिस्से मध्य प्रदेश की तरफ से आग लगी थी और दुर्ग के करीब पहुंच गई थी, धीरे धीरे आग बुझ गई थी। लेकिन आज सुबह से कटरा कालिंजर की ओर फिर से आग लगने से एक बार फिर जंगल में आग की लपटें उठ रही हैं। चारों और जंगल में धुआं ही धुआं दिखाई दे रहा है। अभी तक प्रशासन की ओर से आग बुझाने के लिए किसी तरह के इंतजाम नहीं किए गए। जिन हिस्सों में आग लगी है वहां फायर वर्क सर्विस की गाड़ियां भी नहीं पहुंच सकती हैं। इसलिए पुरातत्व विभाग के कर्मचारी भी कुछ कर पाने में असहाय नजर आ रहे हैं।
