प्रादेशिक डेस्क
लखनऊ। मथुरा के एक संगठन ने अयोध्या में राम मंदिर में रावण की प्रतिमा लगाने की मांग की है। लंकेश भक्त मंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर यह मांग की है। संगठन के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत ने शुक्रवार को कहा, ’’लंकेश भक्त मंडल प्रतिमा स्थापित करने का खर्च उठाएगा।’’ उन्होंने कहा कि ऐसा ही एक पत्र राम जन्मभूमि के अध्यक्ष को भी भेजा गया है। सारस्वत ने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में प्रतिमा स्थापित करना रावण को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि अयोध्या धाम में भगवान श्रीराम के बनाए जा रहे अद्भुत मंदिर में अब भगवान श्रीराम के आचार्य दशानन की भी उसी तरह से भव्य प्रतिमा अयोध्या में लगे। जिस तरह से भगवान श्रीराम की भव्य प्रतिमा लगने जा रही है। उन्होंने कहा है कि सभी लंकेश भक्त राम मंदिर निर्माण में अपना दान देने के साथ-साथ लंकेश की भव्य प्रतिमा के लिए भी दान देंगे।
आपको बता दें कि राम मंदिर निर्माण के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से देशव्यापी निधि समर्पण संग्रह अभियान चल रहा है। इस अभियान में लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। उधर, मंदिर निर्माण के लिए नींव की खुदाई तेज कर दी गई है। इसके पहले देश के प्रतिष्ठित भू-वैज्ञानिकों की मदद से कार्यदाई संस्था एलएण्डटी ने राम मंदिर के नींव की डिजाइन को तैयार करा लिया है। इस डिजाइन पर मंदिर निर्माण समिति की औपचारिक मुहर 22 जनवरी को लग जाएगी। इससे पहले 21 जनवरी को वैज्ञानिकों की टीम थ्री डी इमेज के जरिए डिजाइन का प्रजन्टेशन देगी और समिति के सदस्यों की जिज्ञासाओं का समाधान भी करेगी।
रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय डिजाइन को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं। वह कहते हैं कि जितनी प्रमाणिकता के साथ वैज्ञानिकों ने अपना काम किया है, उसके कारण पूरी दुनिया भारत के इंजीनियरिंग ब्रेन को स्वीकार करेगी। वह कहते हैं कि मंदिर निर्माण शुरु करने से पहले भूमिगत परीक्षण करने में सात माह का समय अवश्य लगा है। फिर भी मंदिर निर्माण के मौलिक समय में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। ऐसे में फरवरी 2021 से मंदिर निर्माण में 39 माह का समय लगेगा। वह कहते हैं कि मैनुवल कार्य होना है, इसलिए दो-चार प्रतिशत इधर-उधर समय में हेराफेरी हो सकती है लेकिन ज्यादा नहीं होगी। उनका मानना है कि अगस्त तक नींव निर्माण का काम पूरा हो जाएगा। फिर मूल मंदिर का काम होगा। राम मंदिर की नींव का कार्य कांटीन्यूअस राफ्ट स्टोन पद्धति से प्रस्तावित किया गया है। इसके लिए करीब चार लाख क्यूबिक सैंड स्टोन की जरूरत बताई गयी है। यह सैंड स्टोन मिर्जापुर से लाए जाएंगे। बताया गया कि एलएण्डटी के अधिकारियों ने वहां से सैंपल मंगवाया था जिसका परीक्षण करने के बाद हरी झंडी दे दी गयी है। बताया गया कि यह सैंड स्टोन बंशीपहाड़पुर स्टोन के मुकाबले काफी सख्त है और सुविधाजनक तरीके से सुलभ भी है। यह भी पता चला कि मिर्जापुर के पत्थरों के सैंपल के साथ ईंटों का भी सैंपल अम्बेडकर नगर से मंगाया गया था। फिलहाल अभी आपूर्ति का आदेश नहीं दिया गया।
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