गोरखपुर (हि.स.)। गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के बारे में गलत रिपोर्ट देने वाले तीन डायग्नोस्टिक सेंटर्स पर बुधवार को बड़ी कार्रवाई हुई। जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन के आदेश पर इनका लाइसेंस निरस्त कर दिया गया और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने इसे सील करने की कार्रवाई की। यह कार्रवाई मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा गठित टीम की रिपोर्ट के आधार पर हुई है।
जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन के निर्देशन पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और एसडीएम सदर गौरव सिंह सोगरवाल ने गोरखपुर के तीन डायग्नोस्टिक सेंटर्स पर ताला जड़ दिया। इनके साथ एसीएमओ डॉ. एनके पांडेय की टीम भी मौजूद रही। वजह, इन डायग्नोस्टिक सेंटर्स पर गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के बारे में गलत रिपोर्ट देकर छल करने का आरोप लगाया गया था। जांच में आरोप को सही पाए जाने पर यह कार्रवाई हुई है।
बता दें कि पीड़ित अभिषेक कुमार पांडेय ने दोषी डायग्नोस्टिक सेंटर्स के खिलाफ कार्रवाई के लिए भूख हड़ताल भी शुरू किया था। इसके बाद डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने इन तीनों डायग्नोस्टिक सेंटर्स को निलंबित कर दिया।
कमिश्नर आवास को घेरासील की कार्रवाई के बाद कमिश्नर आवास का घेराव एसडीएम गौरव सिंह सोगरवाल व एसीएमओ डॉक्टर एनके पांडेय द्वारा गुरुवार को सेंटर सील करने के बाद दोषी करार दिए गए छापड़िया हॉस्पिटल से जुड़े चिकित्सक और कर्मचारियों ने कमिश्नर आवास का धेराव किया। हो-हल्ला करने के बाद वे लौट गए।
बोले ज्वाइंट मजिस्ट्रेटज्वाइंट मजिस्ट्रेट और एसडीएम गौरव सिंह सोगरवाल का कहना है कि जिलाधिकारी के निर्देशन में सीएमओ ने टीम गठित की थी। टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही इन तीनों डायग्नोस्टिक सेंटर्स के लाइसेंस निरस्त हुए हैं। मामले में सहजनवां स्थित न्यू आदित्य अल्ट्रासाउंड सेंटर को भी सील किया जा चुका है। बेतियाहाता स्थित स्पर्श इमेजिंग एंड डायग्नोस्टिक सेंटर एण्ड प्रज्ञा हॉस्पिटल के डायग्नोस्टिक सेंटर को भी निलंबित किया गया है। इसे भी गुरुवार को सील कर दिया गया।
UP News : तीन डायग्नोस्टिक सेंटर्स के लाईसेंस निलंबित, सील
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