-भाजपा पार्षद ने की जांच की मांग
गाजियाबाद(हि.स.)। भाजपा के वरिष्ठ पार्षद राजेन्द्र त्यागी नेनगर निगम में नए ट्यवेल लगाने और पुराने ट्यूवेल को रिबोर कराने के मामले में एक करोड़ से अधिक का भ्रष्टाचार का मामला उजागर किया है।
उनका आरोप है कि नगर निगम के जलकल विभाग ने दिसंबर में ही 9 टयूवेल रिबोर करने और 1 नया टयूवेल लगाने के मामले में ढाई करोड़ से अधिक का अग्रिम भुगतान कर दिया। इस मामले में ई-निविदा प्रणाली के मानकों को ताक पर रखा गया। इस भुगतान से निगम को एक करोड़ से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है।
निगम ने यह भुगतान ट्यूवेल लगाने वाली संस्था जल निगम को किया है। जबकि बीते वर्ष जिन ठेकेदारों ने नगर निगम में ट्यूवेल लगाने और रिबारिंग का काम किया उन्हें नगर निगम काम होने के बाद भुगतान किया और जमानत राशि के साथ सभी टेंडर प्रक्रियाओं का पूरा पालन किया।
भाजपा के वरिष्ठ पार्षद राजेंद्र त्यागी ने बुधवार को एक प्रेसवार्ता में कहा कि नगर निगम ने जलनिगम को नया ठेका देकर निगम को आर्थिक नुकसान हुआ है। जिसमें निविदा प्रक्रिया का पूरी तरह से उल्लंघन किया गया है।
उन्होंने बताया कि नगर निगम के जलकल विभाग द्वारा 2020-21 में अब तक 19 ट्यूवेल रिबोर किए गए है। इसके लिए जलकल विभाग एक ट्यूवेल लगाने की अनुमानित राशि 18 लाख रुपये निर्धारित करते हुए ई निविदा निकाली गई। ठेकेदारोंं ने 8 प्रतिशत से 25.85 प्रतिशत तक तक राशि पर टेंडर डाला। इसी तरह तीन नए ट्यूवेल लगाने के लिए 32 लाख रुपये निर्धारित किए गए। इसमें ठेकेदारों ने 5.05 प्रतिशत से लेकर 23.85 प्रतिशत कम तक राशि पर टेंडर डाला। इस टेंडर प्रक्रिया में पूरे मानकों का पालन किया गया। इनमें ठेकेदारों से 10 प्रतिशत धरोहर राशि जमा कराई गई। जबकि शर्तों के अनुसार काम लेट होने पर 100 प्रतिदिन की दर से अर्थदंड लगाने का प्रावधान किया गया था।
उन्होंने बताया कि इसके उलट इसी महीने नई टेंडर प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखा गया। निगम ने स्थानीय ठेकेदारों की बजाय मेरठ जल निगम को 9 ट्यूवेल लगाने और 1 नया ट्यूवेल लगाने के लिए ठेका दे दिया गया। इसमें काई ई-निविदा का पालन नहीं किया गया। यही भ्रष्टाचार की हद करते हुए अधिकारियों ने जल निगम को 2 करोड़ 58 लाख 52 हजार रुपये अगिम भुगतान कर दिया गया। यह प्रक्रिया नियमों को ताक पर अपनाई गई। इसी काम को स्थानीय ठेकदारों ने ट्यूवेल रिबोर करने के लिए 18 लाख रुपये खर्च किए जबकि नया ट्यूवेल लगाने के लिए 32 लाख रुपये का भुगतान निगम से लिया। नगर निगम ने जल निगम को दिसंबर में दिए काम में ट्यूवेल रिबोर करने के लिए 23 लाख 23 हजार प्रति ट्यूवेल और नया ट्यूवेल लगाने के लिए 49 लाख 65 हजार रुपये के हिसाब से भुगतान किया है। इससे निगम खजाने से एक करोड़ चार लाख रुपये अधिक खर्च हुए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसी साल जब स्थानीय ठेकेदारों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए कम दाम में ट्यूवेल रिबोर करने और नया लगाने का ठेका दिया तो जल निगम जैसी संस्था को एडवांस में अधिक पैसे का भुगतान क्यों किया गया। इसकी जांच होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने नगर आयुक्त सहित शासन को पत्र भी लिखा है। इस मौके पर पार्षद एवं जीडीए बोर्ड मेंबर हिमांशु मित्तल, अधिवक्ता भूपेंद्र चितौड़िया उपस्थित थे।
