बांदा(हि.स.)। व्यापारिक संगठन कन्फर्टेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश उपाध्यक्ष राजकुमार गुप्ता राज ने बताया कि एक फरवरी को आए बजट में जीएसटी के सेक्शन 50(1) में नया प्रावधान जोड़ा गया है जिसमें यदि कोई व्यापारी अपना रिटर्न देरी से भरता है तो अब “नेट लाइबिलिटी” पर ब्याज लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अभी तक देरी से रिटर्न भरने पर ब्याज की गणना ग्रॉस पर की जाती थी, किन्तु अब ब्याज उसी अवस्था में लिया जाएगा। जबकि व्यापारी चालान के माध्यम से कर जमा करता है। बताया कि यह नियम 1 जुलाई 2017 से लागू है। इसका सबसे बड़ा फायदा व्यापारी को यह होगा कि यदि उसने रिटर्न लेट भरा है और उस पर कर दायित्व नहीं है तो ब्याज की देनदारी नहीं होगी। प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य वीरेंद्र गोयल ने कहा कि कैट की मांग पर यद्यपि यह निर्णय लॉकडाउन के दौरान ही जीएसटी कौंसिल द्वारा ले लिया गया था किन्तु सरकार द्वारा इसे कानूनी जामा नहीं पहनाया गया था। पर अब बजट में इसे कानूनी रूप दे देने से व्यापारियों को काफी राहत होगी।
बांदा जिलाध्यक्ष अमित सेठ भोलू ने कहा कि सरकार को धारा 35(4) को भी समाप्त कर देना चाहिए। कैट के नगर अध्यक्ष अमित गुप्ता मनीष ने कैट के राष्ट्रीय नेतृत्व को धन्यवाद ज्ञापित किया है कि उनका संगठन और प्रयास निरंतर व्यापारियों की समस्याओं के लिए सजग सजग रहकर निराकरण कराता है। नगर महामंत्री अजय निषाद ने भी संगठन नेतृत्व को मुक्त कंठ से सराहा है।
UP News : जीएसटी के देरी से भुगतान में “नेट लाइबिलिटी” पर लगेगा ब्याज : कैट
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