बांदा (हि.स.)। जनपद के फतेहगंज थाना क्षेत्र के बघोलन पुरवा में 14 साल पहले दस्यु सरगना अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए एसटीएफ के छह जवानों को पुलिसकर्मियों ने दीप जलाकर पुष्पांजलि अर्पित की।
शहीद हुए एसटीएफ के जवानों कि इससे स्मृति में घटनास्थल पर ही स्मारक बना हुआ है। जहां गुरुवार की शाम से देरशाम तक शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी रहा। फतेहगंज सहित विभिन्न थानों में तैनात पुलिसकर्मियों ने स्मारक पर पहुंचकर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।
बताते चलें कि, 22 जुलाई 2007 को यूपी एसटीएफ ने उस समय के डाकू शिवकुमार उर्फ ददुआ, ठोकिया व छोटवा पटेल के लिए जाल बिछाया। एक ही दिन एक ही समय में तीन टीमों ने अलग-अलग जगहों में इन डकैत गिराहों पर धावा बोला और इनामी डाकू ददुआ, छोटवा पटेल समेत 10 डाकुओं को झलमल व इटवा के पास जंगल में एसटीएफ ने ढेर कर दिया। एसटीएफ की तीसरी टुकड़ी ने ठोकिया गिरोह पर भी फायर झोंके पर वह बच निकला। इसमें उसका साथी मईयादीन पटेल मारा गया। इसके बाद तत्कालीन डीजीपी विक्रम सिंह मौके पर पहुंचे और टीम को शाबाशी दी।
उधर, ददुआ की मौत से बौखलाए ठोकिया ने उसी रात जंगल से गाड़ियों से लौट रही यूपी एसटीएफ की टीम पर फतेहगंज थाना क्षेत्र के बघोलन के पास घात लगाकर हमला कर दिया। डकैतों के हमले में छह जवान शहीद हुए। डकैतों की गोली से पुलिस का मुखबिर भी मारा गया। एक अन्य मुखबिर भी घायल हुआ था।
एसटीएफ के अफसरों ने उस समय बताया था कि उस काली रात को ठोकिया से मुठभेड़ के बाद गैंग के एक सदस्य का शव लाद पूरी टीम वाहनों से लौट रही थी। बारिश के मौसम में रात के अंधेरे में बीच जंगल में चारों तरफ से घेरकर डकैतों ने गोलियां चलाई थी। इसमें छह एसटीएफ के कर्मी शहीद हुए थे। गोलियों से पुलिस के वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए थे।
तत्कालीन इंसपेक्टर डीके यादव व एक सीओ स्तर के अधिकारी ने घायल होने के बावजूद जवाबी गोलियां चलाई थी, तब गैंग पीछे हटा वर्ना एसटीएफ के अत्याधुनिक असलहे भी लुट गए होते। इस दौरान राजेश चौहान, लक्ष्मण शर्मा, गिरिश चन्द्र नागर, बृजेश यादव, उमाशंकर यादव, ईश्वर देव सिंह व मुखबिर रामकरन मारे गए थे। जबकि शिवकुमार अवस्थी, डीके यादव, शरद, योगेश, श्रीचन्द्र यादव, बृजेश तिवारी, राममिलन सिंह, उपेंद्र सिंह, शैलेंद्र सिंह के अलावा मुखबिर श्रीपाल घायल हुए थे। इस घटना के एक साल बाद तब सफलता मिली जब एसटीएफ ने दुर्दांत ठोकिया को उसी के गांव में ढेर कर दिया था।
