फिरोजाबाद (हि.स.)। भारत में गर्भ में लिंग परीक्षण कराना अपराध है, बावजूद कहीं न कहीं घटनाएं सामने आ जाती हैं। इसके प्रति देशभर में जागरूकता व जांच अभियान चलाये जाते हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत जिला सलाहकार समिति की बैठक मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में आयोजित की गयी।
गर्भ में लिंग जांच रोकने के लिए डिकाॅय ऑपरेशन (मुखबिर योजना) के बारेे में बताते हुए अधिकारियों ने कहा कि लिंग जांच के संबंध में गोपनीय सूचना देने वाले को 60 हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
नोडल अधिकारी ने कहा कि इस अधिनियम का उल्लंघन व लिंग जांच करने वालों को तीन से पांच वर्ष की कैद, दस हजार से पचास हजार रुपये तक जुर्माना के साथ ही पंजीकरण भी निरस्त किया जा सकता है। वहीं, जांच कराने वाले नागरिकों पर भी तीन से पांच वर्ष की कैद तथा पचास हजार से एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग की जांच कानूनी अपराध तो है ही, वहीं यह एक सामाजिक अपराध भी है। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षिक डा. साधना राठौर, नोडल अधिकारी पीसीपीएनडीटी तथा अन्य अधिकारी, सदस्य आदि उपस्थित रहे।
UP News : गर्भ में लिंग जांच करने पर होगी तीन से पांच वर्ष की कैद, पंजीकरण भी हो सकता है निरस्त
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