-सीमैप ने गंगा तटीय क्षेत्र के किसानों का कराया प्रशिक्षण कार्यक्रम
-औषधीय पौधों के खेती के बताये फायदे
लखनऊ (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के गंगा के तटीय क्षेत्र में खस एवं आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय एवं सगंध पौधों पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सीएसआईआर- सीमैप लखनऊ द्वारा आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उदघाटन डॉ प्रबोध कुमार त्रिवेदी (निदेशक सीमैप) एवं विशिष्ट मुख्य अतिथि – डॉ जितेंद्र वैश्य (एनएमपीबी), विशिष्ट अतिथि – ब्रिगेडियर नवीन सिंह, मुख्य अतिथि जसदीप सिंह, मुख्य वैज्ञानिक डॉ सौदान सिंह, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ वीरेन्द्र कुमार, प्रधान वैज्ञानिक डॉ राजेश कुमार वर्मा द्वारा किया गया।
सीमैप के निदेशक डाक्टर प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने कहा कि गंगा के तटीय क्षेत्र के लिए खस एवं अन्य औषधीय पौधे आर्थिक रूप से किसानों को मदद करने के अलावा माँ गंगा को स्वच्छ करने में भी अहम भूमिका निभाता है। डॉ जितेंद्र वैश्य ने उद्घाटन सत्र में एनएमपीबी द्वारा संचालित गतिविधियों के बारे में जानकारी दी, किसान लाभान्वित हो सके। डॉ राजेश कुमार वर्मा ने संस्थान के विभिन्न किसानों के हित के लिए चल रही परियोजनाओ के बारे में जैसे गंगा मिशन और एरोमा मिशन के बारे में जानकारी दी।
दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में औषधीय पौधों की गुणवत्ता युक्त बीज उत्पादनए मोरिंगा (सहजन) उत्पादन कि तकनीकीयों, सुगंधित तेलों एवं औषधीय जड़ी बूटी का उत्पादन एव विपणन के बारे में जानकारी दी गई।
इस कार्यक्रम मे डॉ. राजेश कुमार वर्मा (खस), डॉ वीरेन्द्र कुमार (गुणवत्ता युक्त बीज उत्पादन), डॉ राकेश कुमार (नींबूघास के उत्पादन), डॉ प्रियंका सूर्यवंशी (तुलसी के उत्पादन) और कामिनी सिंह मोरिंगा (सहजन) ने किसानों को सुगंधित एवं औस फसलों कि जानकारी दी।
