-उप्र कारूगेटेड बॉक्स मैन्युफैक्चरस एसोसियेशन ने प्रधानमंत्री मोदी से लगाई राहत की गुहार
वाराणसी(हि.स.)। कोरोना काल में आई मंदी और क्राफ्ट पेपर के दर में लगभग 40 से 45 फीसद उछाल से कारूगेटेड बॉक्स उद्योग (गत्ता निर्माण उद्योग) पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पेपर की दर में आये उछाल से इस उद्योग से जुड़े कारोबारियों की अर्थव्यवस्था डगमगा गई है। इस उद्योग में ज्यादातर इकाइयां लगभग 90 फीसदी सूक्ष्म श्रेणी की है। सभी का यही हाल है।
उत्तर प्रदेश कारूगेटेड बॉक्स मैन्युफैक्चरस एसोसियेशन वाराणसी चेप्टर के अध्यक्ष राजेश भाटिया ने मंगलवार को ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से बातचीत में बताया कि सूक्ष्म श्रेणी की सभी एमएसएमई इकाइयां आज क्राफ्ट पेपर की दरों में हुई बेतहाशा वृद्धि के कारण कार्यशील पूंजी के संकट से जूझ रही हैं। देश भर में निर्माण होने वाली लगभग सभी वस्तुओं जैसे एफएमसीजी उत्पाद, दवा, आटो मोबाइल पार्ट, मिल्क, एंड डेयरी प्रोडक्ट, इलेक्ट्रानिक्स गुड्स, रेडीमेड गारमेंट, टैक्सटाइल्स, फुटवियर, आनलाइन रिटेल कारोबार, निर्यात सभी पेपर मूल्य वृद्धि से प्रभावित हैं।
राजेश भाटिया ने बताया कि क्राफ्ट पेपर निर्माता पेपर मिलों ने मूल्य वृद्धि की वजह वेस्ट पेपर की कमी और पेपर का भारी मात्रा में चीन को निर्यात होना बताया है। उन्होंने कहा कि इस पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी धक्का लगेगा। वाराणसी चेप्टर के अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस मामले को संज्ञान लेने की अपील कर कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया जायेगा। उन्होंने सरकार से मांग किया कि क्राफ्ट पेपर एचएसएन 4706, 4808 एवं 4805 के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर देश में इसे पुराने दरों पर कारोबारियों को उपलब्ध कराया जाय।
