-कोरोना महामारी के कारण 130 साल पुरानी परम्परा टूटी-क्षेत्रीय लोगों में पुरानी परम्परा टूटने से छायी मायूसी
हमीरपुर (हि.स.)। बुन्देलखंड क्षेत्र के हमीरपुर जनपद में कोरोना के कारण इस बार दीपावली के दिन रावण का पुतला फूंकने की परम्परा टूट गयी है। इससे क्षेत्रीय लोगों में मायूसी देखी जा रही है। रामलीला कमेटी ने इस परम्परा को कोरोना महामारी के कारण रद्द किया है।
जिले के राठ तहसील मुख्यालय में दीपावली त्योहार के दिन रावण का पुतला फूंक कर दशहरा मनाये जाने की परम्परा कायम थी लेकिन अब इस बार ये परम्परा कोरोना महामारी के कारण टूट गयी है। वैसे देखा जाये तो रावण के पुतले का दहन पूरे भारत वर्ष में दशहरे के दिन होता है लेकिन जनपद का राठ ऐसा इलाका है जहां पिछले 130 सालों से दीपावली के दिन रावण के पुतले का दहन होता है। इसे लोग अनोखी परम्परा मानते है जब दीपावली के दिन रावण का पुतला फूंकते ही लोग एक दूसरे को गले मिलकर बधाई देते है। और तो और लोग घरों में दीये जलाकर खुशी मनाते है।
रामलीला कमेटी के सदस्य हरिमोहन चंदसौरिया ने शनिवार को शाम बताया कि कोरोना महामारी के कारण आज ये परम्परा टूटी है। उन्होंने बताया कि आज देर शाम रामलीला मैदान में राम रावण का पहले युद्ध होता था फिर इसके बाद रावण के पुतले का दहन होता था। राठ नगर में इस परम्परा की लीला के दौरान एक विशाल मेला भी लगता था जिसमें हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती थी मगर अबकी बार कोरोना के बढ़ते फैलाव को लेकर ये सभी कार्यक्रम नहीं हो रहे है। स्थानीय बुजुर्ग लोगों का कहना है कि साल भर में आज के ही दिन दशहरा और दीपावली दोनों त्योहार मनाकर एक दूसरे को खुशियां बांटी जाती थी लेकिन इस कोरोना महामारी ने त्योहारों की खुशियां ही छीन ली है।
दीपावली के दिन रावण के पुतले को दहन करने की ऐसी पड़ी परम्परारामलीला कमेटी के सदस्य हरिमोहन चंदसौरिया ने बताया कि करीब एक सौ तीस साल पहले राठ में रामलीला महोत्सव शुरू हुयी थी। तब उस समय रामलीला मैदान में बरसात का पानी भरा रहता था। बरसात का पानी सूखने में दशहरे का पर्व भी निकल जाता था। इससे दशहरा एवं दीपावली एक ही दिन मनाये जाने की प्रथा पड़ी। उन्होंने बताया कि राठ नगर में रावण के पुतले के दहन करने का कोई स्थान आसपास नहीं था इसलिये दीपावली के दिन ही रावण का पुतला फूंकने की परम्परा शुरू हो गयी। हिन्दु एवं मुस्लिम लोग इस अनोखी परम्परा का हिस्सा बनते रहे है। लेकिन अबकी बार इस एतिहासिक अनोखी परम्परा पर कोरोना वायरस महामारी का ग्रहण लग गया है।
मेला लगने से सैकड़ों दुकानदार होते थे मालामाल बताते है कि दीपावली के दिन मेला लगने से राठ नगर और आसपास के तमाम ग्रामों के सैकड़ों दुकानदार दुकानें लगाकर अपने सामान की बिक्री करते थे। सुबह से लेकर रात तक चलने वाले मेले में बीस हजार से अधिक लोग भी शामिल होते थे जिससे दुकानदारों को कई गुना फायदा मिलता था मगर अबकी बार दुकानदारों में मायूसी देखी जा रही है। रामलीला मैदान में रोजमर्रा के सामानों के साथ अन्य प्रकार की वस्तुयें खरीदने के लिये ग्रामीणों की भीड़ उमड़ती थी। छोटे-छोटे दुकानदारों की भी अच्छी कमाई मेले के दिन होती थी लेकिन कोरोना महामारी ने इनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। कभी दीपावली के दिन रामलीला मैदान में चहलपहल हुआ करती थी लेकिन आज सन्नाटा पसरा है।
