वाराणसी (हि.स.)। केन्द्र सरकार की निजीकरण की नीतियों, बिजली निगमों का एकीकरण सहित विभिन्न मांगों को लेकर बिजली कर्मियों ने बुधवार को जमकर प्रदर्शन के बाद सांकेतिक कार्य बहिष्कार भी किया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश ने एनसीसीओईईई के आह्वान पर केंद्र सरकार की निजीकरण की नीतियों के विरोध में भिखारीपुर स्थित प्रबंध निदेशक कार्यालय पर जुटे बिजली कर्मियों, जूनियर इंजीनियर एवं अभियंताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि निजीकरण का प्रयोग उड़ीसा, ग्रेटर नोएडा और आगरा में बुरी तरह विफल हो चुका है। फिर भी केन्द्र सरकार ने बिजली के निजीकरण के लिए इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेट बिल 2020 एवं स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया है, जिससे देशभर के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा है। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार के निर्देश पर केन्द्र शासित प्रदेशों चंडीगढ़ और पांडिचेरी में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया तीव्र गति से चल रही है, जिसके विरोध में वाराणसी समेत उत्तर प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता देश भर के 15 लाख बिजली कर्मी एक दिवसीय सांकेतिक कार्य बहिष्कार कर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
कर्मचारी नेताओं ने बताया कि कार्य बहिष्कार के दौरान उत्पादन, पारेषण और सिस्टम ऑपरेशन में पाली में कार्य करने वाले कर्मियों को सांकेतिक कार्य बहिष्कार से अलग रखा गया है। विरोध सभा का संचालन जीउत लाल एवं अध्यक्षता इं चंद्रशेखर चौरसिया ने की। इसमं इ. सुनील कुमार यादव, इं. केदार तिवारी, इं संजय भारती, आर के वाही, ए के श्रीवास्तव, राजेन्द्र सिंह, मायाशंकर तिवारी, डॉ. आर बी सिंह, रमन श्रीवास्तव, रमाशंकर पाल, अंकुर पाण्डेय, रामजी भारद्वाज, सोहनलाल आदि शामिल रहे।
UP News : केंद्र सरकार की निजीकरण की नीतियों के विरोध में उबले बिजली कर्मी,धरना प्रदर्शन
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