गाजियाबाद (हि.स.)। गाजियाबाद नगर निगम ने एक कंपनी द्वारा काम पूरा किए बिना ही तीन करोड़ 36 लाख 88 हजार 365 रुपए के स्थान पर आठ करोड़ 97 लाख 13 हजार 602 रुपए का भुगतान कर दिया। इस तरह से पांच करोड़ रुपए ज्यादा का भुगतान कर दिया। भाजपा के वरिष्ठ पार्षद राजेंद्र त्यागी ने इसकी जांच कराने की मांग की है।
नगर निगम में भाजपा के वरिष्ठ पार्षद राजेंद्र त्यागी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नगर निगम के इस घपले की निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह भुगतान राजनीतिक व प्रशासनिक प्रभाव में किया गया है। वर्ष 2016 -17 में नगर निगम में महानगर में परंपरागत स्ट्रीट लाइट सोडियम 40 वाट ट्यूब लाइट सेट को एलईडी में बदलने का टेंडर लखनऊ की फिलाकार्ड टेक्नोलॉजी नामक फर्म को छोड़ा था। इस फर्म ने 50 हजार 214 के सापेक्ष केवल 48 हजार 113 लाइटों का परिवर्तन किया। जबकि प्रकाश निरीक्षकों ने 42966 लाइट को बदलने की संस्तुति की। इतना ही नहीं नगर निगम के स्टॉक में मात्र 35 हजार 388 पुरानी लाइटें ही जमा कराई गई। जो स्ट्रीट लाइट कंपनी ने बदली, उनकी राष्ट्रीय प्रयोगशाला कोलकाता से जांच कराई गई तो उनकी गुणवत्ता नियमों के मुताबिक नहीं पाई गई।
राजेंद्र त्यागी ने अपने पत्र में कहा कि इसमें यह कंपनी उत्तर प्रदेश के एक पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी व बड़े वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के रिश्तेदारों की है। इसी प्रभाव में नगर निगम ने इस कंपनी को काम पूरा कराए बिना सशर्त भुगतान कर दिया। उन्होंने जांच करके कार्रवाई की मांग की। इस मामले में महापौर आशा शर्मा का कहना है कि कम्पनी का सशर्त भुगतान किया गया है। यह मामला शासन स्तर का है।
