Thursday, February 12, 2026
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UP News : करोड़ों के गोलमाॅल में फंसे डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद, डीएम ने की निलंबित करने की सिफारिश

उन्नाव(हि.स.)। पंचायतीराज विभाग ने वैसे सबकुछ गोलमॉल है। एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है जिसमें 16.67 करोड़ रुपये का घालमेल होने की आशंका है। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद यादव को निलंबित करने की सिफारिश की है। उधर जांच टीम एक दो दिन में सम्बंधित लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करा सकते है।

प्रदेश सरकार पंचायतीराज विभाग को स्वच्छता की जागरुकता के लिए आइईसी (सूचना शिक्षा संचार) मद से धनराशि देती है। इसके जरिए दीवार पेंटिंग, बैनर, पोस्टर आदि से स्वच्छता को लेकर प्रचार, प्रसार किया जाता है।

आरोप है कि डीपीआरओ ने इस सबंध में कोई विवरण प्रस्तुत नहीं किया। वहीं मात्र पंचायत सचिव के हस्ताक्षर वाले उपभोग प्रमाणपत्र तैयार कराए। यही नहीं डीपीआरओ ने प्रधान तक के हस्ताक्षर नहीं कराए। डीएम ने इसे वित्तीय अनियमितता माना। अपर मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में डीएम ने बताया कि एसबीएम में सभी प्रकार की वित्तीय स्वीकृतियां जिलाधिकारी द्वारा दी जाती हैं। इसलिए उपयोगिता प्रमाणपत्र उनकेस्तर से निदेशक को भिजवाया जाना चाहिए था लेकिन डीपीआरओ ने ऐसा नहीं किया। यही नहीं डीपीआरओ ने 2019-20 की वार्षिक बैलेंसशीट भी उनके हस्ताक्षर के बिना ही निदेशक को भेज दी। इन्हीं बिंदुओं पर रिपोर्ट भेजकर डीएम रवींद्र कुमार ने अपर मुख्य सचिव से डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद यादव के निलंबन की संस्तुति की है। वहीं सीडीओ दिव्यांशु पटेल ने बताया कि आइईसी, प्रशासनिक व शौचालय व्यय में 16.67 करोड़ खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है।

उपभोग प्रमाणपत्र के मामले में ट्रैक से उतरे डीपीआरओ

डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद यादव ने जिलाधिकारी को संज्ञान में न लेते हुए उपभोग प्रमाण पत्र की फाइल सीधे निदेशक पंचायतीराज को भेज दी। जबकि यह फाइल पहले मुख्य विकास अधिकारी को जानी चाहिए थी। तदुपरान्त जिलाधिकारी के पास पहुंचनी चाहिए थी। लेकिन खेल में माहिर डीपीआरओ ने ऐसा नहीं किया। डीएम को जैसे ही इस मामले की भनक लगी उन्होंने तत्काल जांच के आदेश दिए।

डीएम की आपत्ति के बाद भी डीपीआरओ ने नहीं किया सुधार

डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद ने उपभोग प्रमाणपत्र सम्बन्धी पत्रावली पूर्व में जिलाधिकारी को भेजी थी। जिसमे जिलाधिकारी ने आपत्ति लगाते हुए कि उपभोग प्रमाण पत्र में ग्राम प्रधान,सचिव व एडीओ पंचायत और खंड विकास अधिकारी के हस्ताक्षर कराकर फाइल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। लेकिन डीपीआरओ ने बड़ी चालाकीपूर्ण उपभोग प्रमाणपत्र सम्बन्धी पत्रावली निदेशक पंचायतीराज उत्तर प्रदेश को भेज इतिश्री मान ली थी।

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