गाजियाबाद (हि.स.)।बैंकिंग कम्पनियों व साइबर अपराधियों के बीच तू डाल-डाल मैं पात-पात का खेल चल रहा है। कम्पनियां की चेतावनी के बाद भी लोग जालसाजों को अपने ओटीपी नंबर आदि बता रहे हैं। राजनगर निवासी ओएनजीसी के रिटायर्ड अधिकारी के खाते से 11 लाख की रकम साफ कर दी। जालसाजों ने 85 वर्षीय जगदीश चंद गुप्ता को पहले बैंककर्मी करके फोन किया और उन्हें बताया कि वह उनकी केवाईसी का सत्यापन कर रहे हैं। उन्हें कुछ जानकारियां चाहिए और जो ओटीपी आपके मोबाइल पर आए उसे आप हमें शेयर कर दें। जगदीश चंद्र गुप्ता यह नहीं समझ पाए कि कॉलर कोई बैंककर्मी नहीं है, बल्कि साइबर जालसाज है। कॉलर ने तमाम जानकारियां प्राप्त कर ली और जब ओटीपी नंबर उनके मोबाइल नंबर पर आया तो उन्होंने परिवार के अन्य लोगों से सलाह किए बिना ही ओटीपी नंबर जालसाजों को बता दिया। जगदीश चंद्र ने बताया कि उन्होंने बिजली विभाग का बिजली बिल चुकाने के लिए 3500 रुपए का चेक लगाया हुआ था। चेक क्लियर हुआ या नहीं। जब वह बैंक गए तो उन्हें बताया गया कि आपके बैंक में जितनी भी धनराशि थी वह निकल चुकी है। यह सुनते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। 02 दिन के अंदर उनके खाते में 22 बार ट्रांजैक्शन हुई और इस दौरान 11लाख 08 हजार 675 रुपए निकाल लिए गए। यह घटना 07 और 08 अगस्त की है। इस खाते में उनकी जीवन भर की कमाई जमा थी। अब उनके पास जीवन निर्वाह करने के लिए उनके पास एक भी पैसा नहीं बचा है। इस संबंध में साइबर सेल में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करा दी है। साइबर सेल प्रभारी सुमित कुमार का कहना है कि इस संबंध में पड़ताल की जा रही है। कॉल कहां से आई और कब-कब ट्रांजैक्शन हुई है, इन तमाम बिंदुओं को लेकर पड़ताल शुरू हो गई है। बहुत जल्द अपराधियों को पकड लिया जाएगा।
