Monday, February 9, 2026
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UP News : ऊर्जा निगमों में निदेशकों के रिक्त पदों पर विभागीय अभियन्ताओं की हो नियुक्ति

-विद्युत अभियन्ता संघ ने अतिरिक्त व्यय से बचाने का उपाय सुझाते हुए मुख्य सचिव को भेजा पत्र 

लखनऊ (हि.स.)। कोरोना काल में वित्तीय दबाव के चलते खर्च कम करने के लिए विद्युत अभियन्ता संघ ने ऊर्जा निगमों में निदेशकों के रिक्त पदों पर विभागीय अभियन्ताओं की नियुक्ति की मांग की है। संगठन ने कहा है कि गैर-विभागीय अम्यर्थियों की नियुक्ति से ऊर्जा निगमों पर अतिरिक्त व्यय भार पड़ता है। इसलिए ये उपाय सुझाते हुए अभियन्ता संघ ने इस सम्बन्ध में एक पत्र मुख्य सचिव को प्रेषित किया है।
विद्युत अभियन्ता संघ के अध्यक्ष वीपी सिंह एवं महासचिव प्रभात सिंह ने शनिवार को कहा कि ऊर्जा निगमों में निदेशक के रिक्त पदों पर गैर-विभागीय अभ्यर्थियों की नियुक्ति न कर विभागीय आंतरिक अभ्यर्थियों की नियुक्ति किये जाने के लिए समय-समय पर मांग की जाती रही है। संज्ञान में आया है कि कुछ समय में ऊर्जा निगमों में निदेशक के रिक्त पदों पर नियुक्तियां होनी है जिसके चलते पुनः शासन से अनुरोध किया गया है। 
उन्होंने बताया कि विगत वर्षों में ऊर्जा निगमों में आन्तरिक विभागीय अभियन्ताओं को वरीयता न देकर अन्य राज्यों, केन्द्र सरकार के उपक्रमों जैसे उड़ीसा, महाराष्ट्र, पावर ग्रिड, एनटीपीसी आदि के अभियन्ताओं को निदेशक पदों पर चयनित किया गया। इनमें उदाहरण के तौर पर पूर्व नियुक्त राधेमोहन, पीजी खण्डालकर, पीसी पांडा, पीके अग्रवाल, आरके गुप्ता आदि के अलावा वर्तमान में भी कई लोग गैर-विभागीय निदेशक पदों पर नियुक्त हैं। लेकिन, विभाग एवं उप्र सरकार की कार्य प्रणाली से अनभिज्ञ होने के कारण इन गैर-विभागीय निदेशकों द्वारा कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया जा सका।
संगठन ने मुख्य सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि गैर-विभागीय निदेशकों की कार्य प्रणाली से कई महीनों तक भ्रम, अनिर्णय एवं प्रशासनिक अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती है तथा इन निदेशकों द्वारा विभागीय अभियन्ताओं पर अविश्वास करते हुए उन्हें समय-समय पर अपमानित भी किया जाता है, जिससे कार्यरत अधीनस्थ विभागीय अभियन्ताओं के मनोबल पर विपरीत असर पड़ता है। इसके अतिरिक्त गैर विभागीय, बाहर से नियुक्त किये गये निदेशकों के लिए उनके कार्यालय, वेतन, भत्तों, आवास, एचआरए, चिकित्सा, वाहन आदि पर अतिरिक्त व्यय होता है। इन सबका बोझ आखिरकार विभाग पर ही पड़ता है। 
उन्होंने ऊर्जा मंत्री से अपील की कि आत्मनिर्भर ऊर्जा निगम बनाने के क्रम में विभागीय अभियन्ताओं का विश्वास करते हुए ऊर्जा निगमों में निदेशक पदों पर विभागीय अभियन्ताओं की नियुक्ति की जाए, जिससे ऊर्जा निगमों पर वित्तीय दबाव कम पड़े एवं कार्यप्रणाली भी प्रभावित न हो।

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